Class 12: Hindi Aroh Chapter 10 solutions. Complete Class 12 Hindi Aroh Chapter 10 Notes.
NCERT Solutions for 12th Class Hindi Aroh: Chapter 10-काव्य भाग – छोटा मेरा खेत, बगुलों के पंख
NCERT 12th Hindi Aroh Chapter 10, class 12 Hindi Aroh chapter 10 solutions
कवि परिचय
जीवन परिचय- गुजराती कविता के सशक्त हस्ताक्षर उमाशंकर जोशी का जन्म 1911 ई० में गुजरात में हुआ था। 20वीं सदी में इन्होंने गुजराती साहित्य को नए आयाम दिए। इनको परंपरा का गहरा ज्ञान था। इन्होंने गुजराती कविता को प्रकृति से जोड़ा, आम जिंदगी के अनुभव से परिचय कराया और नयी शैली दी। इन्होंने भारत की आजादी की लड़ाई में भाग लिया तथा जेल भी गए। इनका देहावसान सन 1988 में हुआ।
रचनाएँ- उमाशंकर जोशी का साहित्यिक अवदान पूरे भारतीय साहित्य के लिए महत्वपूर्ण है। इन्होंने एकांकी, निबंध, कहानी, उपन्यास, संपादन व अनुवाद आदि पर अपनी लेखनी सफलतापूर्वक चलाई। इनकी रचनाएँ निम्नलिखित हैं
(i) एकांकी- विश्व-शांति, गंगोत्री, निशीथ, प्राचीना, आतिथ्य, वसंत वर्षा, महाप्रस्थान, अभिज्ञा आदि।
(ii) कहानी- सापनाभारा, शहीद।
(iii) उपन्यास- श्रावणी मेणी, विसामो।
(iv) निबंध- पारकांजव्या ।
(v) संपादन- गोष्ठी, उघाड़ीबारी, क्लांत कवि, म्हारा सॉनेट, स्वप्नप्रयाण तथा ‘संस्कृति’ पत्रिका का संपादन।
(vi) अनुवाद- अभिज्ञान शाकुंतलम् व उत्तररामचरित का गुजराती भाषा में अनुवाद।
काव्यगत विशेषताएँ- उमाशंकर जोशी ने गुजराती कविता को नया स्वर व नयी भंगिमा प्रदान की। इन्होंने जीवन के सामान्य प्रसंगों पर आम बोलचाल की भाषा में कविता लिखी। इनका साहित्य की विविध विधाओं में योगदान बहुमूल्य है। हालाँकि निबंधकार के रूप में ये गुजराती साहित्य में बेजोड़ माने जाते हैं। भाषा-शैली- जोशी जी की काव्य-भाषा सरल है। इन्होंने मानवतावाद, सौंदर्य व प्रकृति के चित्रण पर अपनी कलम चलाई है। इन्होंने कविता के माध्यम से शब्दचित्र प्रस्तुत किए हैं।−
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कविता का सार
(क) छोटा मेरा खेत
इस कविता में कवि ने खेती के रूप में कवि-कर्म के हर चरण को बाँधने की कोशिश की है। कवि को कागज का पन्ना एक चौकोर खेत की तरह लगता है। इस खेत में किसी अंधड़ अर्थात भावनात्मक आँधी के प्रभाव से किसी क्षण एक बीज बोया जाता है। यह बीज रचना, विचार और अभिव्यक्ति का हो सकता है। यह कल्पना का सहारा लेकर विकसित होता है और इस प्रक्रिया में स्वयं गल जाता है। उससे शब्दों के अंकुर निकलते हैं और अंतत: कृति एक पूर्ण स्वरूप ग्रहण करती है जो कृषि-कर्म के लिहाज से पुष्पितपल्लवित होने की स्थिति है। साहित्यिक कृति से जो अलौकिक रस-धारा फूटती है, वह क्षण में होने वाली रोपाई का ही परिणाम है। पर यह रस-धारा अनंत काल तक चलने वाली कटाई से कम नहीं होती। खेत में पैदा होने वाला अन्न कुछ समय के बाद समाप्त हो जाता है, किंतु साहित्य का रस कभी समाप्त नहीं होता।
(ख) बगुलों के पंख
यह कविता सुंदर दृश्य बिंबयुक्त कविता है जो प्रकृति के सुंदर दृश्यों को हमारी आँखों के सामने सजीव रूप में प्रस्तुत करती है। सौंदर्य का अपेक्षित प्रभाव उत्पन्न करने के लिए कवियों ने कई युक्तियाँ अपनाई हैं जिनमें से सर्वाधिक प्रचलित युक्ति है-सौंदर्य के ब्यौरों के चित्रात्मक वर्णन के साथ अपने मन पर पड़ने वाले उसके प्रभाव का वर्णन।
कवि काले बादलों से भरे आकाश में पंक्ति बनाकर उड़ते सफेद बगुलों को देखता है। वे कजरारे बादलों के ऊपर तैरती साँझ की श्वेत काया के समान प्रतीत होते हैं। इस नयनाभिराम दृश्य में कवि सब कुछ भूलकर उसमें खो जाता है। वह इस माया से अपने को बचाने की गुहार लगाता है, लेकिन वह स्वयं को इससे बचा नहीं पाता।
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व्याख्या एवं अर्थग्रहण संबंधी प्रश्न
निम्नलिखित काव्यांशों को ध्यानपूर्वक पढ़कर सप्रसंग व्याख्या कीजिए और नीचे दिए प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
(क) छोटा मेरा खेत
1.
छोटा मोरा खेत चौकोना
कागज़ का एक पन्ना,
कोई अंधड़ कहीं से आया
क्षण का बीज बहाँ बोया गया ।
कल्पना के रसायनों को पी
बीज गल गया नि:शेष;
शब्द के अंकुर फूटे,
पल्लव-पुष्पों से नमित हुआ विशेष। (पृष्ठ-64)
शब्दार्थ- चौकोना-चार कोनों वाला। पन्ना-पृष्ठ। अधड़-आँधी। क्षया-पल। रसायन-सहायक पदार्थ। नि:शोष-पूरी तरह। अंकुर-नन्हा पौधा। फूटे-पैदा हुए। पल्लव-पत्ते। युष्यों-फूलों। नमित-झुका हुआ। विष्णेष-खास तौर पर।
प्रसंग- प्रस्तुत काव्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक ‘आरोह, भाग-2’ में संकलित कविता ‘छोटा मेरा खेत’ से उद्धृत है। इसके रचयिता गुजराती कवि उमाशंकर जोशी हैं। इस अंश में कवि ने खेत के माध्यम से कवि-कर्म का सुंदर चित्रण किया है।
व्याख्या- कवि कहता है कि उसे कागज का पन्ना एक चौकोर खेत की तरह लगता है। उसके मन में कोई भावनात्मक आवेग उमड़ा और वह उसके खेत में विचार का बीज बोकर चला गया। यह विचार का बीज कल्पना के सभी सहायक पदार्थों को पी गया तथा इन पदार्थों से कवि का अहं समाप्त हो गया। जब कवि का अहं हो गया तो उससे सर्वजनहिताय रचना का उदय हुआ तथा शब्दों के अंकुर फूटने लगे। फिर उस रचना ने एक संपूर्ण रूप ले लिया। इसी तरह खेती में भी बीज विकसित होकर पौधे का रूप धारण कर लेता है तथा पत्तों व फूलों से लदकर झुक जाता है।
विशेष-
(i) कवि ने कल्पना के माध्यम से रचना-कर्म को व्यक्त किया है।
(ii) रूपक अलंकार है। कवि ने खेती व कविता की तुलना सूक्ष्म ढंग से की है।
(iii) ‘पल्लव-पुष्प’, ‘गल गया’ में अनुप्रास अलंकार है।
(iv) खड़ी बोली में सुंदर अभिव्यक्ति है।
(v) दृश्य बिंब का सुंदर उदाहरण है।
(vi) प्रतीकात्मकता का समावेश है।
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प्रश्न
(क) कवि ने कवि-कर्म की तुलना किससे की है और क्यों ?
(ख) कविता की रचना-प्रक्रिया समझाइए।
(ग) खेत अगर कागज हैं तो बीज क्षय का विचार, फिर पल्लव-पुष्प क्या हैं?
(घ) मूल विचार को ‘क्षण का बीज’ क्यों का गया है ? उसका रूप-परिवर्तन किन रसायनों से होता है?
उत्तर-
(क) कवि ने कवि-कर्म की तुलना खेत से की है। खेत में बीज खाद आदि के प्रयोग से विकसित होकर पौधा बन जाता है। इस तरह कवि भी भावनात्मक क्षण को कल्पना से विकसित करके रचना-कर्म करता है।
(ख) कविता की रचना-प्रक्रिया फसल उगाने की तरह होती है। सबसे पहले कवि के मन में भावनात्मक आवेग उमड़ता है। फिर वह भाव क्षण-विशेष में रूप ग्रहण कर लेता है। वह भाव कल्पना के सहारे विकसित होकर रचना बन जाता है तथा अनंत काल तक पाठकों को रस देता है।
(ग) खेत अगर कागज है तो बीज क्षण का विचार, फिर पल्लव-पुष्प कविता हैं। यह भावरूपी कविता पत्तों व पुष्पों से लदकर झुक जाती है।
(घ) मूल विचार को ‘क्षण का बीज’ कहा गया है क्योंकि भावनात्मक आवेग के कारण अनेक विचार मन में चलते रहते हैं। उनमें कोई भाव समय के अनुकूल विचार बन जाता है तथा कल्पना के सहारे वह विकसित होता है। कल्पना व चिंतन के रसायनों से उसका रूप-परिवर्तन होता है।
2.
छोटा मोरा खेत चौकोना
कागज़ का एक पन्ना,
कोई अंधड़ कहीं से आया
क्षण का बीज बहाँ बोया गया।
कल्पना के रसायनों को पी
बीज गल गया नि:शेष;
शब्द के अंकुर फूटे,
पल्लव-पुष्पों से नमित हुआ विशेष।
झूमने लगे फल,
रस अलौकिक,
अमृत धाराएँ फुटतीं
रोपाई क्षण की,
कटाई अनंतता की
लुटते रहने से ज़रा भी नहीं कम होती।
रस का अक्षय पात्र सदा का
छोटा मेरा खेत चौकोना। (पृष्ठ-64)
शब्दार्थ- अलौकिक-दिव्य, अद्भुत। रस- साहित्य का आनंद, फल का रस। रोपाई- छोटे-छोटे पौधों को खेत में लगाना। अमृत धाराएँ- रस की धाराएँ। अनतता- सदा के लिए। अक्षय- कभी नष्ट न होने वाला। यात्र –बर्तन, काव्यानंद का स्रोत।
प्रसंग- प्रस्तुत काव्यांश हमारी की पाठ्यपुस्तक ‘आरोह, भाग-2’ में संकलित कविता ‘छोटा मेरा खेत’ से उद्धृत है। इसके रचयिता गुजराती कवि उमाशंकर जोशी हैं। इस कविता में कवि ने खेत के माध्यम से कवि-कर्म का सुंदर चित्रण किया है।
व्याख्या-“छोटा मेरा खेत….. नमित हुआ विशेष।” की व्याख्या काव्यांश-1 में देखें। कवि आगे कहता है कि जब पन्ने रूपी खेत में कविता रूपी फल झूमने लगता है तो उससे अद्भुत रस की अनेक धाराएँ फूट पड़ती हैं जो अमृत के समान लगती हैं। यह रचना पल भर में रची थी, परंतु उससे फल अनंतकाल तक मिलता रहता है। कवि इस रस को जितना लुटाता है, उतना ही यह बढ़ता जाता है। कविता के रस का पात्र कभी समाप्त नहीं होता। कवि कहता है कि उसका कविता रूपी खेत छोटा-सा है, उसमें रस कभी समाप्त नहीं होता।
विशेष-
(i) कवि-कर्म का सुंदर वर्णन है।
(ii) कविता का आनंद शाश्वत है।
(iii) ‘छोटा मेरा खेत चौकाना’ में रूपक अलंकार है।
(iv) तत्सम शब्दावलीयुक्त खड़ी बोली है।
(v) ‘रस’ शब्द के अर्थ हैं-काव्य रस और फल का रस। अत: यहाँ श्लेष अलंकार है।
प्रश्न
(क) ‘रस अलौकिक, अमृत धाराएँ फूटती’। इस की अलौकिक धाराएँ कब, कहाँ और क्यों फूटती हैं?
(ख) ‘लुटते रहने से भी’ क्या काम नहीं होता और क्यों?
(ग) ‘रस का अक्षय पात्र’ किसे कहा गया है और क्यों?
(घ) कवि इन पंक्तियों में खेत से किसकी तुलना कर रहा है?
उत्तर-
(क) अलौकिक अमृत तुल्य रस-धाराएँ फलों के पकने पर फलों से फूट पड़ती हैं। ऐसा तब होता है जब उन पके फलों को काटा जाता है।
(ख) साहित्य का आनंद अनंत काल से लुटते रहने पर भी कम नहीं होता, क्योंकि सभी पाठक अपने-अपने ढंग से रस का आनंद उठाते हैं।
(ग) ‘रस का अक्षय पात्र’ साहित्य को कहा गया है, क्योंकि साहित्य का आनंद कभी समाप्त नहीं होता। पाठक जब भी उसे पढ़ता है, आनंद की अनुभूति अवश्य करता है।
(घ) कवि ने इन पंक्तियों में खेत की तुलना कागज के उस चौकोर पन्ने से की है, जिस पर उसने कविता लिखी है। इसका कारण यह है कि इसी कागजरूपी खेत पर कवि ने अपने भावों-विचारों के बीज बोए थे जो फसल की भाँति उगकर आनंद प्रदान करेंगे।
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(ख) बगुलों के पंख
नभ में पाँती-बाँधे बगुलों के पंख,
चुराए लिए जातीं वे मेरा आँखे।
कजरारे बादलों की छाई नभ छाया,
तैरती साँझ की सतेज श्वेत काया
हले हॉले जाती मुझे बाँध निज माया से।
उसे कोई तनिक रोक रक्खो।
वह तो चुराए लिए जाती मेरी आँखे
नभ में पाँती-बँधी बगुलों के पाँखें। (पृष्ठ-65)
शब्दार्थ- नभ-आकाश । पाँती-पंक्ति । कजरारे-वाले । साँझ-संध्या, सायं । सर्तज-चमकीला, उज्जवल । श्वेत –सफेद। काया-शरीर। हौले-हौले-धीरे-धीरे। निज-अपनी। माया-प्रभाव, जादू। तनिक-थोड़ा। पाँखें–पंख।
प्रसंग-प्रस्तुत कविता ‘बगुलों के पंख’ हमारी पाठ्यपुस्तक ‘आरोह, भाग-2’ में संकलित है। इसके रचयिता उमाशंकर जोशी हैं। इस कविता में सौंदर्य की नयी परिभाषा प्रस्तुत की गई है तथा मानव-मन पर इसके प्रभाव को बताया गया है।
व्याख्या-कवि आकाश में छाए काले-काले बादलों में पंक्ति बनाकर उड़ते हुए बगुलों के सुंदर-सुंदर पंखों को देखता है। वह कहता है कि मैं आकाश में पंक्तिबद्ध बगुलों को उड़ते हुए एकटक देखता रहता हूँ। यह दृश्य मेरी आँखों को चुरा ले जाता है। काले-काले बादलों की छाया नभ पर छाई हुई है। सायंकाल चमकीली सफेद काया उन पर तैरती हुई प्रतीत होती है। यह दृश्य इतना आकर्षक है कि अपने जादू से यह मुझे धीरे-धीरे बाँध रहा है। मैं उसमें खोता जा रहा हूँ। कवि आहवान करता है कि इस आकर्षक दृश्य के प्रभाव को कोई रोके। वह इस दृश्य के प्रभाव से बचना चाहता है, परंतु यह दृश्य तो कवि की आँखों को चुराकर ले जा रहा है। आकाश में उड़तें पंक्तिबद्ध बगुलों के पंखों में कवि की आँखें अटककर रह जाती हैं।
विशेष-
(i) कवि ने सौंदर्य व सौंदर्य के प्रभाव का वर्णन किया है।
(ii) ‘हौले-हौले’ में पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार है।
(iii) खड़ी बोली में सहज अभिव्यक्ति है।
(iv) बिंब योजना है।
(v) ‘आँखें चुराना’ मुहावरे का सार्थक प्रयोग है।
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प्रश्न
(क) कवि किस दूश्य पर मुग्ध हैं और क्यों?
(ख) ‘उसे कोई तनिक रोक रक्खी-इस पक्ति में कवि क्या कहना चाहता हैं?
(ग) कवि के मन-प्रायों को किसने अपनी आकर्षक माया में बाँध लिया हैं और कैसे?
(घ) कवि उस सौंदर्य को थोड़ी देर के लिए अपने से दूर क्यों रोके रखना चाहता हैं? उसे क्या भय हैं?
उत्तर-
(क) कवि उस समय के दृश्य पर मुग्ध है जब आकाश में छाए काले बादलों के बीच सफेद बगुले पंक्ति बनाकर उड़ रहे हैं। कवि इसलिए मुग्ध है क्योंकि श्वेत बगुलों की कतारें बादलों के ऊपर तैरती साँझ की श्वेत काया की तरह प्रतीत हो रहे हैं।
(ख) इस पंक्ति में कवि दोहरी बात कहता है। एक तरफ वह उस सुंदर दृश्य को रोके रखना चाहता है ताकि उसे और देख सके और दूसरी तरफ वह उस दृश्य से स्वयं को बचाना चाहता है।
(ग) कवि के मन-प्राणों को आकाश में काले-काले बादलों की छाया में उड़ते सफेद बगुलों की पंक्ति ने बाँध लिया है। पंक्तिबद्ध उड़ते श्वेत बगुलों के पंखों में उसकी आँखें अटककर रह गई हैं और वह चाहकर भी आँखें नहीं हटा पा रहा है।
(घ) कवि उस सौंदर्य को थोड़ी देर के लिए अपने से दूर रोके रखना चाहता है क्योंकि वह उस दृश्य पर मुग्ध हो चुका है। उसे इस रमणीय दृश्य के लुप्त होने का भय है।
काव्य-सौंदर्य बोध संबंधी प्रश्न
निम्नलिखित काव्यांशों को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए-
(क) छोटा मेरा खेत
1.
छोटा मेरा खेत चौकोना
कागज का एक पन्ना,
कोई अधड़ कहीं से आया
क्षण का बीज वहाँ बोया गया।
कल्पना के रसायनी को पी
बीज गल गया निःशेष;
शब्द के अंकुर फूटे,
पल्लव-पुष्पों से नमित हुआ विशेष।
प्रश्न
(क) शब्द के अकुर फूटने के माध्यम से कवि क्या कहना चाहता है?
(ख) इस अंश में संगरूपक अलंकार दिखाई देता है। कैसे?
(ग) इस पपद्यांश का भाषिक सौंदर्य बताइए।
उत्तर-
(क) शब्द के अंकुर फूटने के माध्यम से कवि कहना चाहता है कि भाव-विचार काव्यात्मक रूप लेकर कल्पना के सहारे विकसित होकर कविता का रूप ले लेता है।
(ख) इस अंश में कवि ने सांगरूपक अलंकार का प्रयोग किया है। कवि ने कविता और खेती की तुलना सूक्ष्म ढंग से की है। बीज के बोने से लेकर उसके विकसित होने तक की क्रिया और भाव के रचना बनने तक की क्रिया को व्यक्त किया है। कागज़ के पन्ने व चौकोर खेत में आकार व गुण की समानता बताई गई है। अत: यहाँ रूपक अलंकार है।
(ग) इस अंश में कवि ने तत्सम शब्दों का सुंदर प्रयोग किया है।’रसायन’विज्ञान का शब्द है। खड़ी बोली में सहज अभिव्यक्ति है। कागज, पन्ना आदि विदेशी शब्द हैं। भाषा में सरलता है।
2.
झूमने लगे फल,
रस अलौकिक,
अमृत धाराएँ फुटतीं
रोपाई क्षण की,
कटाई अनंतता की
लुटते रहने से ज़रा भी नहीं कम होती।
रस का अक्षय पात्र सदा का
छोटा मेरा खेत चौकेना।
प्रश्न
(क) इस अंश का भाव-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।
(ख) इस अंश का काव्य-सौंदर्य बताइए।
(ग) ‘लुटते रहने से कम नहीं होती’ का सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
(क) इस अंश में कवि ने काव्य रस की अलौकिकता पर प्रकाश डाला है। काव्य का रस अनंतकाल तक रहता है तथा यह निरंतर बाँटने पर और अधिक बढ़ता है। इसके अतिरिक्त, शाश्वत रचनाएँ क्षण भर में ही उत्पन्न होती हैं।
(ख) इस अंश में कवि ने श्लेष अलंकार का प्रयोग किया है। ‘रस’ शब्द के दो अर्थ हैं-साहित्यिक आनंद व फलों का रस। तत्सम शब्दावली के बावजूद भाषा में सहजता है। मुक्त छंद का प्रयोग है। दृश्य बिंब है। ‘छोटा मेरा खेत चौकोना’ में रूपक अलंकार है। ,
(ग)
● ‘लुटते रहने से कम नहीं होती’ का भाव यह है कि काव्य-रस का चाहे जितना भी आस्वादन किया जाए या बाँटा जाए, कम नहीं होता।
● लुटते रहने के बाद भी कम न होने के कारण विरोधाभास अलंकार है।
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(ख) बगुलों के पंख
नभ में पाँती-बाँधे बगुलों के पंख,
चुराए लिए जातीं वे मेरा आँखे।
कजरारे बादलों की छाई नभ छाया,
तैरती साँझ की सतेज श्वेत काया
हले हॉले जाती मुझे बाँध निज माया से।
उसे कोई तनिक रोक रक्खो।
वह तो चुराए लिए जाती मेरी आँखे
नभ में पाँती-बँधी बगुलों के पाँखें
प्रश्न
(क) ‘हौले-हौले जाती मुझे बाँध -पंक्ति का भाव स्पष्ट कीजिए।
(ख) काव्यांश का भाव-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।
(ग) इम कविता का काव्य-सौंदर्य बताइए।
उत्तर-
(क) ‘हौले-हौले जाती मुझे बाँध’ पंक्ति का भाव यह है कि सायंकालीन आकाश में उड़ते बगुलों की कतारें अद्भुत दृश्य उपस्थित कर रही हैं, जो कवि को लुभा रही हैं।
(ख) कवि ने इस कविता में प्राकृतिक सौंदर्य के मानव-मन पर पड़ने वाले प्रभाव का चित्रण किया है। सायंकाल के समय आकाश में सफेद बगुलों की पंक्ति अद्भुत दृश्य उत्पन्न कर रही है। दृश्य बिंब साकार हो रहा है।
(ग)
(i) कवि ने प्रकृति को मानवीय क्रियाएँ करते दिखाया है, अत: मानवीकरण अलंकार है ‘तैरती साँझ की सतेज श्वेत काया।’
(ii) ‘कजरारे बादलों की छाई नभ छाया’ में उत्प्रेक्षा अलंकार है।
(iii) ‘हौले-हौले’ में पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार है।
(iv) ‘आँखें चुराना’ मुहावरे का सुंदर प्रयोग है।
(v) साहित्यिक खड़ी बोली है।
(vi) बिंब-योजना का सुंदर प्रयोग है।
(vii) कोमलकांत पदावली का प्रयोग है-पाँती बँधे, हौले-हौले, बगुलों की पाँखें।
पाठ्यपुस्तक से हल प्रश्न
कविता के साथ
1. छोटे चौकोने खेत की कागज़ का पना कहने में क्या अर्ध निहित है? [CBSE (Delhi), 2010]
अथवा
कागज़ के पन्ने की तुलना छोटे चौंकाने खेत से करने का आधार स्पष्ट कीजिए। [CBSE (Delhi), 2014]
उत्तर-
छोटे चौकोने खेत को कागज़ का पन्ना कहने में यही अर्थ निहित है कि कवि ने कवि कर्म को खेत में बीज रोपने की तरह माना है। इसके माध्यम से कवि बताना चाहता है कि कविता रचना सरल कार्य नहीं है। जिस प्रकार खेत में बीज बोने से लेकर फ़सल काटने तक काफ़ी मेहनत करनी पड़ती है, उसी प्रकार कविता रचने के लिए अनेक प्रकार के कर्म करने पड़ते हैं।
2. रचना के संदर्भ में ‘अंधड़’ और ‘बीज’ क्या है?
उत्तर-
रचना के संदर्भ में ‘अंधड़’ का अर्थ है-भावना का आवेग और ‘बीज’ का अर्थ है-विचार व अभिव्यक्ति। भावना के आवेग से कवि के मन में विचार का उदय होता है तथा रचना प्रकट होती है।
3. ‘रस का अक्षय पात्र’ से कवि ने रचना कर्म की किन विशेषताओं की ओर इंगित किया है?
उत्तर-
अक्षय का अर्थ है-नष्ट न होने वाला। कविता का रस इसी तरह का होता है। रस का अक्षय पात्र कभी भी खाली नहीं होता। वह जितना बाँटा जाता है, उतना ही भरता जाता है। यह रस चिरकाल तक आनंद देता है। खेत का अनाज तो खत्म हो सकता है, लेकिन काव्य का रस कभी खत्म नहीं होता। कविता रूपी रस अनंतकाल तक बहता है। कविता रूपी अक्षय पात्र हमेशा भरा रहता है।
4. व्याख्या करें-
- शब्द के अंकुर फूटे
पल्लव-पुष्पों से नमित हुआ विशेष। - रोपाई क्षण की,
कटाई अनंतता की
लुटते रहने से ज़रा भी नहीं कम होती।
उत्तर-
- कवि कहना चाहता है कि जब वह छोटे खेतरूपी कागज के पन्ने पर विचार और अभिव्यक्ति का बीज बोता है तो वह कल्पना के सहारे उगता है। उसमें शब्दरूपी अंकुर फूटते हैं। फिर उनमें विशेष भावरूपी पुष्प लगते हैं। इस प्रकार भावों व कल्पना से वह विचार विकसित होता है।
- कवि कहता है कि कवि-कर्म में रोपाई क्षण भर की होती है अर्थात भाव तो क्षण-विशेष में बोया जाता है। उस भाव से जो रचना सामने आती है, वह अनंतकाल तक लोगों को आनंद देती है। इस फसल की कटाई अनंतकाल तक चलती है। इसके रस को कितना भी लूटा जाए, वह कम नहीं होता। इस प्रकार कविता कालजयी होती है।
कविता के आस-पास
1. शब्दों के माध्यम से जब कवि दूश्यों, चित्रों, ध्वनि-योजना अथवा रूप-रस-गांध को हमारे ऐंद्रिक अनुभवों में साकार कर देता हैं तो बिब का निमणि होता है। इस आधार पर प्रस्तुत कविता से बिब की खोज करें।
उत्तर-
कवि ने बिंबों की सुंदर योजना की है। अपने भावों को प्रस्तुत करने के लिए बिंबों का सहारा उमाशंकर जोशी ने लिया है। कुछ बिंब निम्नलिखित हैं
प्रकृति बिंब
- छोटा मेरा खेत चौकोना।
- कोई अंधड़ कहीं से आया।
- शब्द के अंकुर फैंटे।
- पल्लव पुष्पों से नमित हुआ विशेष।
- झूमने लगे फल।
- नभ में पाँती बँधे बगुलों के पाँख।
- वह तो चुराए लिए जाती मेरी आँखें।
2. जहाँ उपमेय में उपमान का आरोप हो, रूपक कहलाता हैं। इस कविता में से रूपक का चुनाव करें।
उत्तर-
(i) भावोंरूपी आँधी।
(ii) विचाररूपी बीज।
(iii) पल्लव-पुष्पों से नमित हुआ विशेष।
(iv) कजरारे बादलों की छाई नभ छाया।
(v) तैरती साँझ की सतेज श्वेत काया।
अन्य हल प्रश्न
लघूत्तरात्मक प्रश्न
1. ‘छोटा मेरा खेत’ कविता में कवि ने खेत को रस का अक्षय पात्र क्यों कहा है?
उत्तर-
कवि ने खेत को रस का अक्षय पात्र इसलिए कहा है क्योंकि अक्षय पात्र में रस कभी खत्म नहीं होता। उसके रस को जितना बाँटा जाता है, उतना ही वह भरता जाता है। खेत की फसल कट जाती है, परंतु वह हर वर्ष फिर उग आती है। कविता का रस भी चिरकाल तक आनंद देता है। यह सृजन-कर्म की शाश्वतता को दर्शाता है।
2. ‘छोटा मेरा खेत’ कविता का रूपक स्पष्ट कीजिए ? [CBSE (Delhi), 2009]
उत्तर-
इस कविता में कवि ने कवि-कर्म को कृषि के कार्य के समान बताया है। जिस तरह कृषक खेत में बीज बोता है, फिर वह बीज अंकुरित, पल्लवित होकर पौधा बनता है तथा फिर वह परिपक्व होकर जनता का पेट भरता है। उसी तरह भावनात्मक आँधी के कारण किसी क्षण एक रचना, विचार तथा अभिव्यक्ति का बीज बोया जाता है। यह विचार कल्पना का सहारा लेकर विकसित होता है तथा रचना का रूप ग्रहण कर लेता है। इस रचना के रस का आस्वादन अनंतकाल तक लिया जा सकता है। साहित्य का रस कभी समाप्त नहीं होता।
3. कवि को खेत का रूपक अपनाने की ज़रूरत क्यों पड़ी?
उत्तर-
कवि का उद्देश्य कवि-कर्म को महत्ता देना है। वह कहता है कि काव्य-रचना बेहद कठिन कार्य है। बहुत चिंतन के बाद कोई विचार उत्पन्न होता है तथा कल्पना के सहारे उसे विकसित किया जाता है। इसी प्रकार खेती में बीज बोने से लेकर फसल की कटाई तक बहुत परिश्रम किया जाता है। इसलिए कवि को खेत का रूपक अपनाने की जरूरत पड़ी।
4. ‘छोटा मेरा खेत हैं कविता का उद्देश्य बताइए।
उत्तर-
कवि ने रूपक के माध्यम से कवि-कर्म को कृषक के समान बताया है। किसान अपने खेत में बीज बोता है, वह बीज अंकुरित होकर पौधा बनता है तथा पकने पर उससे फल मिलता है जिससे लोगों की भूख मिटती है। इसी तरह कवि ने कागज को अपना खेत माना है। इस खेत में भावों की आँधी से कोई बीज बोया जाता है। फिर वह कल्पना के सहारे विकसित होता है। शब्दों के अंकुर निकलते ही रचना स्वरूप ग्रहण करने लगती है तथा इससे अलौकिक रस उत्पन्न होता है। यह रस अनंतकाल तक पाठकों को अपने में डुबोए रखता है। कवि ने कवि-कर्म को कृषि-कर्म से महान बताया है क्योंकि कृषि-कर्म का उत्पाद निश्चित समय तक रस देता है, परंतु कवि-कर्म का उत्पाद अनंतकाल तक रस प्रदान करता है।
5. शब्दरूपी अंकुर फूटने से कवि का क्या तात्पर्य है ?
उत्तर-
कवि कहता है कि जिस प्रकार खेत में बीज पड़ने के कुछ दिनों बाद उसमें अंकुर फूटने लगते हैं, उसी प्रकार विचाररूपी दिस अंड्रफ्ट लातेहैं। यहाकविता कर्मक पाहताचणहै इसाके बाद हारवना अनास्वाप – ग्रहण करती है।
6. कविता लुटने पर भी क्यों नहीं मिटती या खत्म होती?
उत्तर-
यहाँ’लुटने से’ आशय बाँटने से है। कविता का आस्वादन अनेक पाठक करते हैं। इसके बावजूद यह खत्म नहीं होती क्योंकि कविता जितने अधिक लोगों तक पहुँचती है उतना ही अधिक उस पर चिंतन किया जाता है। वह शाश्वत हो जाती है।
7. ‘अंधड़’ से क्या तात्पर्य है?
उत्तर-
‘अंधड़’ भावनात्मक आवेग है। काव्य-रचना अचानक किसी प्रेरणा से होती है। कवि के मन में भावनाएँ होती हैं। जिस भी विचार का आवेग अधिक होता है, उसी विचार की रचना अपना स्वरूप ग्रहण करती है।
8. ‘बीज यल गया विब्लोप ‘ से क्या तात्पर्य है?
उत्तर-
इसका अर्थ यह है कि जब तक कवि के मन में कविता का मूल भाव पूर्णतया समा नहीं जाता, तब तक वह निजता (अह) से मुक्त नहीं हो सकता। कविता तभी सफल मानी जाती है, जब वह समग्र मानव-जाति की भावना को व्यक्त करती है। कविता को सार्वजनिक बनाने के लिए कवि का अहं नष्ट होना आवश्यक है।
9. ‘बगुलों के पंख ‘ कविता का प्रतिपाद्य बताइए।
उत्तर-
यह सुंदर दृश्य कविता है। कवि आकाश में उड़ते हुए बगुलों की पंक्ति को देखकर तरह-तरह की कल्पनाएँ करता है। ये बगुले कजरारे बादलों के ऊपर तैरती साँझ की सफेद काया के समान लगते हैं। कवि को यह दृश्य अत्यंत सुंदर लगता है। वह इस दृश्य में अटककर रह जाता है। एक तरफ वह इस सौंदर्य से बचना चाहता है तथा दूसरी तरफ वह इसमें बँधकर रहना चाहता है।
10. ‘पाँती-बँधी’ से कवि का आवश्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
इसका अर्थ है-एकता। जिस प्रकार ऊँचे आकाश में बगुले पंक्ति बाँधकर एक साथ चलते हैं। उसी प्रकार मनुष्यों को एकता के साथ रहना चाहिए। एक होकर चलने से मनुष्य अद्भुत विकास करेगा तथा उसे किसी का भय भी नहीं रहेगा।
स्वर्य करें
1. कवि को खेत कागज के पन्ने के समान लगता है। आप इससे कितना सहमत हैं?
2. कवि ने साहित्य को किस संज्ञा से संबोधित किया है और क्यों?
3. कवि-कर्म और कृषि-कर्म दोनों में से किसका प्रभाव दीर्घकालिक होता है और कैसे?
4. कवि सायंकाल में किस माया से बचने की कामना करता है और क्यों?
5. ‘बगुलों के पंख’ कविता के आधार पर शाम के मनोहारी प्राकृतिक दृश्य का अपने शब्दों में वर्णन कीजिए।
अथवा
कवि उमाशंकर जोशी में प्रकृति का सूक्ष्म निरीक्षण करने की अनूठी क्षमता है-उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।
6. निम्नलिखित काव्यांशों को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
(अ)
झूमने लगे फल
रस अलौकिक
अमृत धाराएँ फूटतीं
रोपाई क्षण की,
कटाई अनंत की
लुटते रहने से जरा भी कम नहीं होती।
(क) काव्यांश का भाव-सौंदर्य लिखिए।
(ख) भाषा-शिल्प सबधित दो विशेषताएँ लिखिए।
(ग) अतिम पंक्ति का भाव–साँदर्य स्पष्ट कीजिए
(ब)
नभ में पाँती-बँधे बगुलों के पंख,
चुराए लिए जातीं वे मेरी आँखें।
कजरारे बादलों की छाई नभ छाया,
तैरती साँझ की सतेज श्वेत काया।
(क) अतिंम पवित का भावन्सदिवं स्पष्ट काँजिए।
(ख) काव्याश की भाषागत विशंपताएँ लिखिए।
(ग) काव्यांश की अलकार-योजना पर प्रकाश डालिए।
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NCERT Solutions for 12th Class Hindi Aroh: Chapter 10-काव्य भाग – छोटा मेरा खेत, बगुलों के पंख
Chapterwise NCERT Solutions for Class 12 Hindi Aroh :
- Chapter 1-काव्य भाग – आत्म-परिचय, एक गीत
- Chapter 2-काव्य भाग – पतंग
- Chapter 3-काव्य भाग – कविता के बहाने, बात सीधी थी पर
- Chapter 4-काव्य भाग – कैमरे में बंद अपाहिज
- Chapter 5-काव्य भाग – सहर्ष स्वीकारा है
- Chapter 6-काव्य भाग – उषा
- Chapter 7-काव्य भाग – बादल राग
- Chapter 8-काव्य भाग – कवितावली (उत्तर कांड से), लक्ष्मण-मूच्छ और राम का विलाप
- Chapter 9-काव्य भाग – रुबाइयाँ, गज़ल
- Chapter 10-काव्य भाग – छोटा मेरा खेत, बगुलों के पंख
- Chapter 11-गद्य भाग - भक्तिन
- Chapter 12-गद्य भाग - बाजार दर्शन
- Chapter 13-गद्य भाग - काले मेघा पानी दे
- Chapter 14-गद्य भाग - पहलवान की ढोलक
- Chapter 15-गद्य भाग - चार्ली चैप्लिन यानी हम सब
- Chapter 16-गद्य भाग - नमक
- Chapter 17-गद्य भाग - शिरीष के फूल
- Chapter 18-गद्य भाग - श्रम-विभाजन और जाति-प्रथा, मेरी कल्पना का आदर्श समाज
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