Class 8: Hindi Sulabhbharati Chapter 1 solutions. Complete Class 8 Hindi Sulabhbharati Chapter 1 Notes.
Maharashtra Board Solutions for Class 8- Hindi Sulabhbharati (Part 2): Chapter 1- धरती का आँगन महके
Maharashtra Board 8th Hindi Sulabhbharati Chapter 1, Class 8 Hindi Sulabhbharati Chapter 1 solutions
Questions and Answers
सूचना के अनुसार कृतियाँ करो:
प्रवाह तालिका पूर्ण करो:

Answer:

कृति पूर्ण करो :

Answer:
उत्तर लिखो:

Question 1.
मेधा की ऊँचाई नापेगा
Answer:
प्रतिभा का पैमाना मेधा की ऊँचाई नापेगा।
Question 2.
हम सब मिलकर करें
Answer:
वसुधा के जयगान से अर्चना हम सब मिलकर करें।
कृति करो:
मानव अंतरिक्ष यान से यहाँ पहुँचा है।
Answer:

निम्नलिखित काव्य पंक्तियाँ पूर्ण कीजिए।
Question 1.
______ आवृत्त कर दें स्नेह प्रभा परिधान से,
करें अर्चना हम सब मिलकर वसुधा _______।
Answer:
आत्मा को आवृत्त कर दें स्नेह प्रभा परिधान से,
करें अर्चना हम सब मिलकर वसुधा के जयगान से।
भाषाबिंदु
Question 1.
निम्नलिखित शब्दों के समानार्थी शब्द लिखिए तथा उनका वाक्य में प्रयोग कीजिए।
शरीर, मनुष्य, पृथ्वी, छाती, पथ
Answer:

Question 2.
पाठों में आए सभी प्रकार के सर्वनाम ढूँढ़कर उनका अपने वाक्य में प्रयोग कीजिए।
Answer:


उपयोजित लेखन
Question 1.
‘छाते की आत्मकथा’ विषय पर निबंध लिखिए।
Answer:
मैं हूँ छाता। मुझे छतरी भी कर जाता है। जैसे बरसात शुरू हो जाती है, वैसे ही लोगों को मेरी उपयोगिता महसूस होने लगती है। संसार में मेरा उपयोग सब जगह पर होता है। आज मैं कई रूपों व कई रंगों में पाया जाता हूँ। फोल्डिंग के रूप में भी आप मुझे देख सकते हैं। मैं लोगों को बरसात व गरमी से बचाता हूँ। कहा जाता है कि मेरा सबसे पहले आविष्कार चीन में हुआ था। मेरा जन्म एक कारखाने में हुआ था। वहाँ से मुझे दुकानदारों के पास पहुंचाया गया। बरसात शुरू होने से पहले लोग मुझे अधिक कीमत देकर खरीद लेते हैं।
लोगों की सेवा करने में मुझे परम सुख की प्राप्ति होती है। इंग्लैंड की महारानी विक्टोरिया भी मेरा इस्तेमाल करती थीं। यह मेरे लिए बहुत ही आनंद की बात है। जिस प्रकार मेरे जीवन में हर्ष है; वैसे ही मेरे जीवन में दुख भी है। कुछ लोग मेरा प्रयोग ठीक से नहीं करते हैं। कुछ लोग मुझे लापरवाही से पटक देते हैं। इस कारण मेरी हालत बिगड़ जाती है। जब मैं फट जाता हूँ या मुझसे तार अलग हो जाते हैं, तब लोग मेरी मरम्मत करवा लेते हैं। इससे मुझे नया जीवन मिलता है। स्वयं धूप व वर्षा सहकर दूसरों की रक्षा करना, यही मेरा परम कर्तव्य है। आखिर, अपने कर्तव्य का पालन करना मेरा परम कार्य है।
Question 2.
‘विश्व शांति की माँग सर्वाधिक प्रसांगिक है।’ इस तथ्य पर अपने विचार लिखिए।
Answer:
आज मनुष्य को स्वार्थों ने जकड़ लिया है। वह अपने स्वार्थ की पूर्ति हेतु भयानक अस्त्रों-शस्त्रों का प्रयोग करने लगा है। इस कारण मानवता खतरे में पड़ गई है और चारों ओर हिंसा का माहौल निर्माण हो गया है। सभी देश अपनी शक्ति का प्रदर्शन करने हेतु परमाणु बम बना रहे हैं। यदि ऐसा ही होता रहा, तो एक दिन समस्त पृथ्वी का विनाश संभव है। इसे रोकने के लिए आज विश्व शांति की बात की जा रही है। आखिर, शांति में ही हिंसा को रोकने की शक्ति है। विश्व शांति के लिए मेल-मिलाप व भाईचारे की भावना की जरूरत है। सदाचार व स्नेह को अपनाकर एक-दूसरे के साथ मानवता का व्यवहार करके शांति की स्थापना की जा सकती है।
स्वयं अध्ययन
प्राचीन भारतीय शिल्पकला संबंधी सचित्र जानकारी संकलित करो, विशेष कलाकृतियों की सूची बनाओ।
Additional Important Questions and Answers
एक शब्द में उत्तर लिखिए।
Question 1.
सरिता के प्रवाहित होने से ये खिलेंगे
Answer:
खेत।
Question 2.
पैरों की गति इसमें बँधी हुई है
Answer:
विश्वासों की राह में।
Question 3.
ऐसे होते हैं अस्त्र
Answer:
विनाशक।
कृति क (३) भावार्थ
निम्नलिखित पद्यांशों का भावार्थ लिखिए।
Question 1.
धरती का आँगन ……………………. सब धान से।
Answer:
प्रस्तुत पंक्तियाँ कवि डॉ. प्रकाश दीक्षित द्वारा लिखित ‘धरती का आँगन महके’ कविता से ली गई हैं। कर्म, ज्ञान व विज्ञान की महत्ता के कारण धरती का आँगन महक रा है। मनुष्य ने कर्म ज्ञान व विज्ञान के बल पर धरती का नाम रोशन किया है। कवि के मतानुसार अपने कर्म द्वारा ज्ञान व विज्ञान के बल पर धरती पर सभी खेत लहलहा उठे ऐसी धारा प्रवाहित करो। कर्म, ज्ञान व विज्ञान के द्वारा धरती को संपन्न बना दो।
Question 2.
अभिलाषाएँ …………. विश्वासों की राह में।
Answer:
प्रस्तुत पंक्तियाँ कवि डॉ. प्रकाश दीक्षित द्वारा लिखित ‘धरती का आँगन महके’ कविता से ली गई हैं। कवि के मतानुसार आज वर्तमान युग में मनुष्य की अभिलाषाएँ यानी चाह आशाओं की छाँह में नित मुस्करा रही हैं। मनुष्य को आशा है कि आज नहीं तो कल उसकी सारी कामनाएँ पूरी होंगी। इसलिए उसके पैर बड़े विश्वास के साथ प्रगति पथ पर
तेजी से आगे ही आगे बढ़ रहे हैं।
Question 3.
शिल्पकला ……………………. श्रृंगार हो।
Answer:
प्रस्तुत पंक्तियाँ कवि डॉ. प्रकाश दीक्षित द्वारा लिखित ‘धरती का आँगन महके इस कविता से ली गई हैं। कवि के मतानुसार इस धरती पर मानव ने कर्म करके शिल्पकला का निर्माण किया है। यह शिल्पकला कमल रूपी फूलों की माला जैसी है जिससे इस धरती का गौरव बढ़ा है। वह धरती के गले का हार है। कवि की हार्दिक कामना है कि यह धरती फूलों-फलों से संपन्न हो और धरती के श्रृंगार में वृद्धि हो।
कृति ख (२) आकलन कृति
निम्नलिखित कथन सत्य है या असत्य लिखिए।
Question 1.
सदाचार व स्नेह के जरिए मानवता का विकास होगा।
Answer:
सत्य
Question 2.
हम सभी को मिलकर धरती का जयगान करने के लिए अर्चना करनी चाहिए।
Answer:
असत्य
उत्तर लिखिए।
Question 1.
प्रतिभा का पैमाना यह बनकर मन की गहराई मापता है
Answer:
मानवता का मीटर बनकर मन की गहराई मापता है।
Question 2.
यह मन की सुंदरता का मूल्य बताती है
Answer:
सदाचार की शुभ शलाका मन की सुंदरता का मूल्य बताती है।
कृति ख (३) भावार्थ
निम्नलिखित पद्यांशों का भावार्थ लिखिए।
Question 1.
साँस-साँस ……………………. सुंदरता आँकती।
Answer:
प्रस्तुत पंक्तियाँ कवि डॉ. प्रकाश दीक्षित द्वारा लिखित ‘धरती का आँगन महके’ इस कविता से ली गई हैं। इस धरती ने साँस-साँस का जीवनपट बुनकर सभी के प्राणों का तन हक दिया है। कवि के मतानुसार सदाचार व स्नेह के द्वारा ही मानवता का विकास होगा। सदाचार रूपी शुभ शलाका मन की सुंदरता को आँकने का काम करेगी। मानवता के विकास के लिए सभी को सदाचार एवं स्नेह को अपनाना चाहिए।
Question 2.
प्रतिभा का पैमाना …………………… गहराई।
Answer:
प्रस्तुत पंक्तियाँ कवि डॉ. प्रकाश दीक्षित द्वारा लिखित ‘धरती का आँगन महके’ कविता से ली गई हैं। कवि कहते हैं कि प्रतिभा का मानदंड बुद्धि की ऊँचाई नापने का काम करता है। सभी के हृदय में मानवता निर्माण होनी चाहिए। मानवता को मनुष्य के दिल की गहराई मापने का कार्य करना चाहिए अर्थात मानव की प्रतिभा को मानवता के लिए
कार्य करना चाहिए।
Question 3.
आत्मा को ………………….. जयगान से।
Answer:
प्रस्तुत पंक्तियाँ कवि डॉ. प्रकाश दीक्षित द्वारा लिखित ‘धरती का आँगन महके’ कविता से ली गई हैं। मनुष्य को अपनी आत्मा स्नेह रूपी प्रकाश से बैंक देना चाहिए। स्नेह से व्यक्ति को अपनी आत्मा स्वयं प्रकाशित करनी चाहिए। जब ऐसा होगा; तब धरती पर मानवता का विकास होगा। हम सभी को मिलकर धरती का जयगान करने के लिए पूजा-अर्चना करनी चाहिए।
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Maharashtra Board Solutions for Class 8- Hindi Sulabhbharati (Part 2): Chapter 1- धरती का आँगन महके
Chapterwise Maharashtra Board Solutions Class 8 Hindi Sulabhbharati :
Part 1
- Chapter 1- हे मातृभूमि!
- Chapter 2- वारिस कौन?
- Chapter 3- नाखून क्यों बढ़ते हैं?
- Chapter 4- गाँव-शहर
- Chapter 5- मधुबन
- Chapter 6- जरा प्यार से बोलना सीख लीज
- Chapter 7- मेरे रजा साहब
- Chapter 8- पूर्ण विश्राम
- Chapter 9- अनमोल वाणी
Part 2