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NCERT Solutions for 9th Class हिंदी : पाठ 5 - नाना साहब की पुत्री देवी मैना को भस्म कर दिया गया

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Curriculum NCERT
Applicable Grade Primary (1-5)
Medium English & Hindi
Resource Format Chapter Q&A / PDF

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Class 9: हिंदी Chapter 5 solutions. Complete Class 9 हिंदी Chapter 5 Notes.

NCERT Solutions for 9th Class हिंदी : पाठ 5 - नाना साहब की पुत्री देवी मैना को भस्म कर दिया गया

NCERT 9th हिंदी Chapter 5, class 9 हिंदी Chapter 5 solutions

पृष्ठ संख्या:55

प्रश्न अभ्यास 

1. बालिका मैना ने सेनापति 'हे' को कौन-कौन से तर्क देकर महल की रक्षा के लिए प्रेरित किया ?

उत्तर

बालिका मैना ने अपने पिता के महल की रक्षा के लिए निम्नलिखित तर्क दिए-
1. मैना ने तर्क दिया कि महल को गिराने से सेनापति की किसी उद्देशय की पूर्ति न हो सकेगी।
2. मैना ने अंग्रेज़ों के विरुद्ध शस्त्र उठाने वालों को दोषी बताया और कहा कि इस जड़ पदार्थ मकान ने कोई अपराध नहीं किया।
3. अंत में मैना ने सेनापति 'हे' को अपना परिचय देकर बताया कि उन्हें उनकी पुत्री मेरी की सहेली की रक्षा करनी ही चाहिए।

2. मैना जड़ पदार्थ मकान को बचाना चाहती थी पर अंग्रेज़ उसे नष्ट करना चाहते थे। क्यों ?

उत्तर

मैना उसी मकान में पली-बढ़ी थी। उसी में उसकी बचपन की, पिता की, परिवार की यादें समाई हुई थीं। इसलिए वह जड़ मकान उसके लिए भरी-पूरी ज़िंदगी के समान था। वह उसके जीवन का भी सहारा हो सकता था। इसलिए वह उसे बचाना चाहती थी।
अंग्रेज़ों के लिए वह राजमहल उनके दुश्मन नाना साहब की निशानी था। वे उनकी हर निशानी को मिट्टी में मिला देना चाहते थे, ताकि देश में फिर से कोई अंग्रेज़ों के विरुद्ध आवाज़ न उठाए।

3. सर टामस 'हे' के मैना पर दया-भाव के क्या कारण थे ?

उत्तर

मैना का करुणामयी मुख और उसकी अल्पायु देखकर सेनापति 'हे' को उस पर दया आई। वह उसकी पुत्री 'मेरी' की सहेली भी थी।

4. मैना की अंतिम इच्छा थी कि वह उस प्रासाद के ढेर पर बैठकर जी भरकर रो ले लेकिन पाषाण-हृदय वाले जनरल ने किस भय से उसकी इच्छा पूर्ण न होने दी ?

उत्तर

मैना महल के ढेर पर बैठकर जी भर कर रो लेना चाहती थी पर पाषाण-हृदय जनरल अउटरम ने उसकी यह इच्छा पूरी न होने दी। जनरल अउटरम के मन में भय रहा होगा कि अगर उसने नाना साहब की बेटी के प्रति ज़रा भी सहानुभूति दिखाई तो ब्रिटिश सरकार का गुस्सा उस पर फूट पड़ेगा। उसे इसके लिए दंड भी मिल सकता है। क्रोध से पागल सामान्य, अंग्रेज़ नागरिक भी उस पर नाराज़गी प्रकट करेंगे। इस कारण उसने मैना की यह छोटी-सी इच्छा भी पूरी न होने दी।

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5. बालिका मैना के चरित्र की कौन-कौन सी विशेषताएँ आप अपनाना चाहेंगें और क्यों ?

उत्तर

बालिका मैना के चरित्र की निम्नलिखित विशेषताएँ हम अपनाना चाहेंगें :-
1. वह एक साहसी तथा वाक् चतुर बालिका थी।
2. पैतृक धरोहर और देशप्रेम की भावना।
3. निर्भय तथा आत्मबलिदान की भावना।
4. भावुकता और तर्कशीलता।

6. 'टाइम्स' पत्र ने 6 सितम्बर को लिखा था - 'बड़े दुख का विषय है कि भारत सरकार आज तक उस दुर्दांत नाना साहब को नहीं पकड़ सकी'। इस वाक्य में 'भारत सरकार'से क्या आशय है ?

उत्तर

यहाँ भारत सरकार से आशय है - ब्रिटिश शासन के अंतर्गत चलने वाली भारत सरकार जिसे अंग्रेज़ अधिकारी चलाते थे।

पृष्ठ संख्या: 56

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रचना और अभिव्यक्ति 

7. स्वाधीनता आंदोलन को आगे बढ़ाने में इस प्रकार के लेखन की क्या भूमिका रही होगी ?

उत्तर

स्वाधीनता आंदोलन को बढ़ाने में इस प्रकार के लेखों की भूमिका महत्तवपूर्ण रही होगी। लोग जब अंग्रेज़ों के अत्याचारों को पढ़ते होंगे तो उनके विरुद्ध हो जाते होंगे। जब वे मैना जैसी निडर बालिका के निर्मम वध की बात सुनते होंगे तो उनका हृदय करूणा से भर उठता होगा। तब उनका मन त्याग, बलिदान और संघर्ष के लिए तैयार हो जाता होगा। यही भाव स्वाधीनता आंदोलन को बढ़ाने में मददगार सिद्ध हुआ होगा।

8. कल्पना कीजिए कि मैना के बलिदान की यह खबर आपको रेडियो पर प्रस्तुत करनी है। इन सूचनाओं के आधार पर आप एक रेडियो समाचार तैयारी करें और कक्षा में भावपूर्ण शैली में पढ़े।

उत्तर

यह आकाशवाणी का कानपूर चैनल है और इस वक्त आप (अपना नाम) के साथ हैं। आजकी महत्वपूर्ण खबर मैना  के बलिदान से जुडी है। अत्यंत दुःख के साथ हमे आपको यह सूचित करना पड़ रहा कल सांयकाल के समय मैनादेवी का दुखद अवसान हो गया है। समाचार यह है कि अंग्रेज जनरल अउटरम द्वारा बड़ी ही अमानवीयता के साथ मैनादेवी को जलती हुई आग में भस्म कर दिया गया। सारा शहर इस क्षोभ से अत्यंत क्रुद्ध तथा दुखी है। मैना एक अदम्य साहसी बालिका थी। उनका यह बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा आने वाले समय में देशवासियों को प्रेरणा प्रदान करता रहेगा। धन्यवाद।

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9. इस पाठ में रिपोर्ताज के प्रारंभिक रूप की झलक मिलती है लेकिन आज अखबारों में अधिकांश खबरें रिपोर्ताज की शैली में लिखी जाती हैं। आप-
(क) कोई दो खबरों को किसी अखबार से काटकर अपनी कॉपी में चिपकाइए तथा कक्षा में पढ़कर सुनाइए।
(ख) अपने आसपास की किसी घटना का वर्णन रिपोर्ताज शैली में कीजिए।
उत्तर-

(क) समाचार पत्रों से ली गईं दो खबरें

1. पूर्व उपराज्यपाल के कार्यकाल में प्रस्ताव बनाया गया था, विभिन्न एजेंसियों की आपसी खींचतान की वजह से योजना अटकी
चांदनी चौक में ट्राम चलाने की योजना खटाई में पड़ी
नई दिल्ली – जितेंद्र भारद्वाज
चांदनी चौक में ट्राम चलाने की योजना सिविक एजेंसियों की खींचतान में फंस गई है। पूर्व उपराज्यपाल नजीब जंग के समय यह प्रोजेक्ट बना था। मेट्रो को इसकी नोडल एजेंसी बनाया गया था। परिवहन प्राधिकरण, पीडब्ल्यूडी और ट्रैफ़िक पुलिस इसमें सदस्य थे।
दिल्ली में वर्ष 1963 तक ट्राम चांदनी चौक की शान रही हैं। इसे फिर से चलाने के लिए वर्ष 2014 में तत्कालीन उपराज्यपाल नजीब जंग ने एक कमेटी बनाई थी। कमेटी ने रिपोर्ट दी थी कि फतेहपुरी मस्जिद से नेताजी सुभाष मार्ग और कौड़िया पुल से परेड ग्राउंड लालकिले तक ट्राम चलाई जा सकती है।
ट्राम वाले रूट पर सुबह आठ बजे से रात आठ बजे तक यहाँ कोई दूसरा वाहन नहीं चलेगा। मेट्रो-ट्रैफिक पुलिस के सूत्रों का कहना है कि फिलहाल यह योजना आगे नहीं बढ़ पा रही है। जिस एजेंसी को जो काम सौंपा गया, वह तय समये पर नहीं हुआ। एजेंसियों ने कुछ कामों को अधिकार क्षेत्र में नहीं होने की बात कहकर दूसरे के पाले में धकेल दिया।

पुरानी ट्राम

  • 1908 से 1963 तक ट्राम के रास्ते में जामा मस्जिद, चांदनी चौक और सदर बाजार का इलाका पड़ता था, घोड़े खींचते थे ट्राम।
  • 1960 में सबसे छोटा टिकट आधा आना, सबसे बड़ा चार आना।
  • 1889 में नासिक और 1895 में चेन्नई में ट्राम चली थी।
  • 1873 में कोलकाता, 1864 मुंबई और 1915 में पटना में ट्राम चली।
  • 1908 में दिल्ली में लॉर्ड हार्डिंग ने ट्राम शुरू की।

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2. बदलाव का श्रेय शिक्षकों को : सीएम
सम्मान
नई दिल्ली – प्रमुख संवाददाता
दो साल में दिल्ली सरकार ने शिक्षा के क्षेत्र में छोटे-छोटे बदलाव किए हैं। इन बदलावों से हुए सुधारों का श्रेय दिल्ली सरकार के शिक्षकों को जाता है। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने मंगलवार को शिक्षक दिवस पर आयोजित सम्मान समारोह में यह बात कही।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जो भी दिल्ली के शिक्षकों ने किया उसकी चर्चा दुनिया भर में हुई। सरकार ने अपने कार्यकाल में शिक्षकों को सम्मान देने की कोशिश की है। जैसा सम्मान शिक्षकों के लिए पुरानी परंपराओं में दिया जा रहा था। जो समाज अपने शिक्षक का सम्मान करता है। यह समाज भी आगे बढ़ता है। इस समारोह में 91 शिक्षकों को सम्मानित किया गया। जिसमें 25 हजार रुपये, शाल व प्रशस्तिपत्र देकर सम्मानित किया गया।

मनीष सिसोदिया ने इस मौके पर कहा कि आज का दिन शिक्षकों का दिन है। आपके योगदान के सम्मान के लिए सरकार यहाँ उपस्थित है। उन्होंने कहा कि आप सब लोग इंसान व राष्ट्र बनाने के लिए काम कर रहे हैं। आज तन मन धन से शिक्षक काम कर रहे हैं। दो साल पहले तक जब भी सम्मान मिले तो यह सादा कार्यक्रम में नहीं भव्यता के साथ होना चाहिए। हर साल इस आयोजन को बड़ा किया जाए। आज करीब सवा लाख शिक्षक हैं, वे जबरदस्त भूमिका निभा रहे हैं। सरकार शिक्षा बजट बढ़ाने का श्रेय ले सकती है लेकिन काम शिक्षकों ने किया है। शिक्षकों के लिए आयोजित इस कार्यक्रम में विशेष बात यह थी कि यहाँ मंच का संचालन छात्रों को दिया गया था। विभिन्न स्कूलों के बच्चों को पहली बार मंच संचालन का मौका दिया गया।

केजरीवाल बोले

  • दिल्ली के शिक्षकों की चर्चा आज सारी दुनिया में हो रही है।
  • त्यागराज स्टेडियम में आयोजित किया गया भव्य कार्यक्रम।

(ख) अपने आसपास की एक घटना का रिपोर्ताज शैली में वर्णन-
रानीखेड़ा के लोग कचरे पर कुछ भी नहीं सुनेंगे
नई दिल्ली – प्रमुख संवाददाता
रानीखेड़ा गांव में कचरा डाले जाने के विरोध में ग्रामीण तीसरे दिन मंगलवार को भी डटे रहे। निगम के ट्रक कचरा डालने न आएँ, इसके लिए ग्रामीण रातभर पहरेदारी करते रहे। ग्रामीणों ने लिखित आश्वासन से पहले मौके से नहीं हटने की बात कही है।

गाजीपुर लैंडफिल साइट पर हुए हादसे के बाद से ही दिल्ली में हरदिन पैदा होने वाले कचरे का निष्पादन बड़ी समस्या के तौर पर सामने आया है। गाजीपुर में कचरा डालने पर रोक के बाद निगम की ओर से रानीखेड़ा गांव में राविवार को कचरा डालने का प्रयास किया गया था, लेकिन, ग्रामीणों ने कचरे के ट्रकों को वापस लौटा दिया। तब से ही ग्रामीण मौके पर जमे हुए हैं। दिन में महिलाएँ और बच्चे धरने पर बैठे रहे, जबकि रात के समय पुरुषों द्वारा पहरेदारी की जा रही है।

स्थानीय निवासी सतबीर डबास ने कहा कि जब तक रानीखेड़ा में कूड़ा नहीं डालने का लिखित आश्वासन उपराज्यपाल की ओर से नहीं दिया जाएगा, तब तक ग्रामीण मौके से नहीं हटेंगे। इसके लिए चाहे कुछ भी करना पड़े।
हिंदुस्तान 6 सितंबर, 2017 से साभार

10. आप किसी ऐसे बालक/बालिका के बारे में एक अनुच्छेद लिखिए जिसने कोई बाहदुरी का काम किया हो।
उत्तर-

दीपावली नजदीक थी। धनतेरस वाले दिन हमारे एक जानकार सपरिवार हमसे मिलने घर आए थे। दीपावली के आसपास
वैसे भी दुकानों पर और बाजारों में भीड़-भाड़ बढ़ जाती है। हमारे जानकार ने विचार किया कि यहाँ तक आए हैं तो दीपावली के लिए कुछ खरीददारी यहीं से करते चलें पर यह बात उन्होंने अपने तक ही सीमित रखा और पाँच-साढे पाँच बजे वे हमारे घर से निकले और बाजार चले गए। भीड़ होने के कारण वे अपनी पत्नी के साथ मोटरसाइकिल से धीरे-धीरे जा रहे थे। उनकी पत्नी का ध्यान आसपास की दुकानों पर रहा होगा तभी एक बीस-इक्कीस वर्षीय युवक ने उनके गले से चेन खींच ली। वह चेन लेकर भागने लगा तभी एक बारह-तेरह साल के लड़के ने उसे रोकना चाहा पर उसने लड़के को एक चाँटा मारा और कुछ ही दूर बाइक की ओर भागा। वहाँ उसका साथी बाइक स्टार्ट कर चुका था। वह बाजार की उल्टी दिशा में तेजी से बाइक दौड़ाकर गायब हो गया।

इधर हमारे जानकार ने जल्दी से अपनी बाइक खड़ी की। उन्होंने अपनी पत्नी को सांत्वना दी और देखा कि उनका गला चेन से एक दो जगह कट-सा गया था। उन्होंने तुरंत सौ नंबर पर फ़ोन किया। दस मिनट बाद पुलिस आई उनका बयान नोट किया तभी हमारे जानकार के पास वही बारह-तेरह वर्ष का बालक आया और कागज पर कुछ लिखा हुआ थमाकर चलता बना। हमारे जानकार ने देखा उस कागज पर उस बाइक का नंबर था जिस पर वह भागा था। पुलिस को बाइक का नंबर मिलते ही कार्यवाही में आसानी हुई। रात दस बजे तक चेन खींचने वाला और उसका साथी थाने में थे। अगले दिन पुलिस ने हमारे जानकार को थाने बुलाकर चैन लौटा दी। वे जानकार जब भी हमारे घर आते हैं, उस बालक के प्रति कृतज्ञता जताना नहीं भूलते।

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भाषा अध्यन

11. भाषा में वर्तनी का स्वरूप बदलता रहता है। इस पाठ में हिंदी गद्य का प्रारंभिक रूप व्यक्त हुआ है जो लगभग ७५-८० वर्ष पहले था। इस पाठ के किसी पसंदीदा अनुच्छेद को वर्तमान मानक हिंदी रूप में लिखिए।

उत्तर

कानपूर में घटित हत्याकांड के बाद अंग्रेजी सैनिक दल बिठूर की ओर गया। बिठूर में स्थित नाना साहब का राजमहल अंग्रेजों द्वारा लूट लिया गया। लेकिन अंग्रेज अधिक नुकसान नहीं कर पाए।
इसके बाद अंग्रेजों ने तोप द्वारा नाना साहब के महल को उड़ा देना चाहा,तभी महल के बरामदे में एक सुंदर बालिका आकर खड़ी हो गई। यह देखकर अंग्रेजी सेना को हैरानी हुई क्योंकि महल को लूटते समय यह बालिका वहाँ दिखाई नहीं दी।

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