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Class 10th NCERT Solutions Hindi Sanchayan Bhag 2: Chapter 1 हरिहर काका

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Curriculum NCERT
Applicable Grade Class 10
Medium English & Hindi
Resource Format Chapter Q&A / PDF

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Class 10: Hindi Sanchayan Chapter 1 solutions. Complete Class 10 Hindi Sanchayan Chapter 1 Notes.

Class 10th NCERT Solutions Hindi Sanchayan Bhag 2: Chapter 1 हरिहर काका

NCERT 10th Hindi Sanchayan Chapter 1, class 10 Hindi Sanchayan Chapter 1 solutions

प्रश्न 1. कथावाचक और हरिहर काका के बीच क्या संबंध है और इसके क्या कारण हैं?
उत्तर-
हरिहर काका और कथावाचक (लेखक) दोनों के बीच में बड़े ही मधुर एवं आत्मीय संबंध थे, क्योंकि दोनों एक गाँव के निवासी थे। कथावाचक गाँव के चंद लोगों का ही सम्मान करता था और उनमें हरिहर काका एक थे। इसके निम्नलिखित कारण थे-

  1. हरिहर काका कथावाचक के पड़ोसी थे।
  2. कथावाचक की माँ के अनुसार हरिहर काका ने उसे बचपन में बहुत प्यार किया था।
  3. कथावाचक के बड़े होने पर उसकी पहली दोस्ती हरिहर काका के साथ ही हुई थी। दोनों आपस में बहुत ही खुल कर बातें करते थे।

प्रश्न 2. हरिहर काका को महंत और अपने भाई एक ही श्रेणी के क्यों लगने लगे?
उत्तर-
हरिहर काका एक निःसंतान व्यक्ति थे। उनके पास पंद्रह बीघे जमीन थी। हरिहर काका के भाइयों ने पहले तो उनकी खूब देखभाल की परंतु धीरे-धीरे उनकी पत्नियों ने काका के साथ दुर्व्यवहार करना शुरू कर दिया। महंत को जब यह पता चला तो वह बहला-फुसलाकर काका को ठाकुरबारी ले आए और उन्हें वहाँ रखकर उनकी खूब सेवा की। साथ ही उसने काका से उनकी पंद्रह बीघे जमीन ठाकुरबारी के नाम लिखवाने की बात की। काका ने जब ऐसा करने से मना किया तो महंत ने उन्हें मार-पीटकर जबरदस्ती कागज़ों पर अँगूठा लगवा दिया। इस बात पर दोनों पक्षों में जमकर झगड़ा हुआ। दोनों ही पक्ष स्वार्थी थे। वे हरिहर काका को सुख नहीं दुख देने पर उतारू थे। उनका हित नहीं अहित करने के पक्ष में थे। दोनों का लक्ष्य जमीन हथियाना था। इसके लिए दोनों ने ही काका के साथ छल व बल का प्रयोग किया। इसी कारण हरिहर काका को अपने भाई और महंत एक ही श्रेणी के लगने लगे।

प्रश्न 3. ठाकुरबारी के प्रति गाँव वालों के मन में अपार श्रद्धा के जो भाव हैं उससे उनकी किस मनोवृत्ति का पता चलता है?
उत्तर-
ठाकुरबारी के प्रति गाँव वालों के मन में अपार श्रद्धा के जो भाव हैं, उनसे उनकी ठाकुर जी के प्रति भक्ति भावना, आस्तिकता, प्रेम तथा विश्वास को पता चलता है। वे अपने प्रत्येक कार्य की सफलता का कारण ठाकुर जी की कृपा को मानते थे।

प्रश्न 4. अनपढ़ होते हुए भी हरिहर काका दुनिया की बेहतर समझ रखते हैं? कहानी के आधार पर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
अनपढ़ होते हुए भी हरिहर काका दुनिया की बेहतर समझ रखते हैं। वे जानते हैं कि जब तक उनकी जमीन-जायदाद उनके पास है, तब तक सभी उनका आदर करते हैं। ठाकुरबारी के महंत उनको इसलिए समझाते हैं क्योंकि वह उनकी जमीन ठाकुरबारी के नाम करवाना चाहते हैं। उनके भाई उनका आदर-सत्कार जमीन के कारण करते हैं। हरिहर काका ऐसे कई लोगों को जानते हैं, जिन्होंने अपने जीते जी अपनी जमीन किसी और के नाम लिख दी थी। बाद में उनका जीवन नरक बन गया था। वे नहीं चाहते थे कि उनके साथ भी ऐसा हो।

प्रश्न 5. हरिहर काका को जबरन उठा ले जाने वाले कौन थे? उन्होंने उनके साथ कैसा बरताव किया?
उत्तर-
महंत के संकेत पर ठाकुरबारी के साधु-संत हरिहर काका को उठाकर ले गए थे। पहले उन्हें समझा-बुझाकर सादे कागज़ पर अँगूठे का निशान लेने का प्रयास किया गया। सफलता न मिलने पर ज़बरदस्ती निशान लेकर हाथ-पाँव और मुँह बाँधकर उन्हें कमरे में बंद कर दिया गया था।

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प्रश्न 6. हरिहर काका के मामले में गाँववालों की क्या राय थी और उसके क्या कारण थे?
उत्तर-
हरिहर काका के मामले में गाँव के लोगों के दो वर्ग बन गए थे। दोनों ही पक्ष के लोगों की अपनी-अपनी राय थी। आधे लोग परिवार वालों के पक्ष में थे। उनका कहना था कि काका की जमीन पर हक तो उनके परिवार वालों का बनता है। काका को अपनी ज़मीन-जायदाद अपने भाइयों के नाम लिख देनी चाहिए, ऐसा न करना अन्याय होगा। दूसरे पक्ष के लोगों का मानना था कि महंत हरिहर की ज़मीन उनको मोक्ष दिलाने के लिए लेना चाहता है। काका को अपनी ज़मीन ठाकुरजी के नाम लिख देनी चाहिए। इससे उनका नाम या यश भी फैलेगा और उन्हें सीधे बैकुंठ की प्राप्ति होगी। इस प्रकार जितने मुँह थे उतनी बातें होने लगीं। प्रत्येक का अपना मत था। इन सबको एक कारण था कि हरिहर काका विधुर थे और उनकी अपनी कोई संतान न थी जो उनका उत्तराधिकारी बनता। पंद्रह बीघे जमीन के कारण इन सबका लालच स्वाभाविक था।

प्रश्न 7. कहानी के आधार पर स्पष्ट कीजिए कि लेखक ने यह क्यों कहा, “अज्ञान की स्थिति में ही मनुष्य मृत्यु से डरते हैं। ज्ञान होने के बाद तो आदमी आवश्यकता पड़ने पर मृत्यु को वरण करने के लिए तैयार हो जाता है।”
उत्तर
लेखक ने यह इसलिए कहा है, क्योंकि अज्ञान की ही स्थिति में अर्थात् सांसारिक आसक्ति या नश्वर संसार के सुख की इच्छा के कारण ही मनुष्य मृत्यु से डरते हैं। जब उन्हें यह ज्ञान हो जाता है कि मृत्यु तो अटल सत्य है, क्योंकि जो इस धरती पर जन्म लेता है, उसकी मृत्यु तो निश्चित है तथा जब यह शरीर जीर्ण-शीर्ण हो जाता है, तो इस मृत्यु के माध्यम से प्रभु हमें नया शरीर और नया जीवन देते हैं, तब वे मृत्यु से घबराते नहीं, डरते नहीं, बल्कि मृत्यु आने पर उसका स्वागत करते हैं, अर्थात् उसका वरण करते हैं।

प्रश्न 8. समाज में रिश्तों की क्या अहमियत है? इस विषय पर अपने विचार प्रकट कीजिए।
उत्तर-
आज समाज में मानवीय मूल्य तथा पारिवारिक मूल्य धीरे-धीरे समाप्त होते जा रहे हैं। ज्यादातर व्यक्ति अपने स्वार्थ के लिए रिश्ते-नाते निभाते हैं। अब रिश्तों से ज्यादा रिश्तेदार की कामयाबी और स्वार्थ सिधि की अहमियत है। रिश्ते ही उसे अपने-पराए में अंतर करने की पहचान करवाते हैं। रिश्तों के द्वारा व्यक्ति की समाज में विशेष भूमिका नि रित होती है। रिश्ते ही सुख-दुख में काम आते हैं। यह दुख की बात है कि आज के इस बदलते दौर में रिश्तों पर स्वार्थ की भावना हावी होती जा रही है। रिश्तों में प्यार व बंधुत्व समाप्त हो गया है। इस कहानी में भी यदि पुलिस न पहुँचती तो परिवार वाले काका की हत्या कर देते । इनसानियत तथा रिश्तों का खून तब स्पष्ट नज़र आता है जब महंत तथा परिवार वालों को काका के लिए अफ़सोस नहीं बल्कि उनकी हत्या न कर पाने की अफ़सोस है। ठीक इसी प्रकार आज रिश्तों से ज्यादा धन-दौलत को अहमियत दी जा रही है।

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प्रश्न 9. यदि आपके आसपास हरिहर काका जैसी हालत में कोई हो तो आप उसकी किस प्रकार मदद करेंगे?
उत्तर-
यदि हमारे आसपास हरिहर काका जैसी हालत में कोई हो तो हम उसकी सहायता निम्न प्रकार से करेंगे-

  1. सबसे पहले हम उसके घरवालों को समझाएंगे कि वे अपने पुनीत कर्तव्य के प्रति सचेत रहें।
  2. असहाय व्यक्ति की खान-पान, रहन-सहन वस्त्र आदि की व्यवस्था समयानुसार करें।
  3. उसके परिवार के सदस्यों को समझाएँगे कि असहाय व्यक्ति की यदि तुम सहायता करोगे, तो उसका फल तुम्हें अवश्य मिलेगा। अर्थात् उनकी जमीन, संपत्ति स्वतः ही तुम्हें मिल जाएगी।
  4. धूर्त महंत, पुजारी, साधु आदि की रिपोर्ट पुलिस में करेंगे और पुलिस को बताएँगे कि इनकी आँखों पर लालच का चश्मा लगा हुआ है। ये असहाय व्यक्ति की ज़मीन पर बलपूर्वक कब्जा करना चाहते हैं।
  5. भाइयों, महंत, साधु व पुजारियों की खबर मीडिया को देंगे ताकि उनका दुष्प्रचार हो सके। साथ ही सरकारी हस्तक्षेप से उन्हें अपने किए की सजा मिल सके। साथ ही हरिहर काका जैसे व्यक्ति को न्याय मिल सके।

प्रश्न 10. हरिहर काका के गाँव में यदि मीडिया की पहुँच होती तो उनकी क्या स्थिति होती? अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर-
हरिहर काका का जिस प्रकार से धर्म और घर अर्थात् खून के रिश्तों से विश्वास उठ चुका था, उससे वे मानसिक रूप से बीमार हो गए थे। वे बिलकुल चुप रहते थे। किसी की भी कोई बात का कोई उत्तर नहीं देते थे। वर्तमान दृष्टि से यदि देखा जाए तो आज मीडिया की अहम् भूमिका है। लोगों को सच्चाई से अवगत करना उसका मुख्य कार्य है। जन-संचार के दुवारा घर-घर में बात पहुँचाई जा सकती है। इसके द्वारा लोगों तथा समाज तक बात पहुँचाना आसान है। यदि हरिहर काका की बात मीडिया तक पहुँच जाती तो शायद स्थिति थोड़ी भिन्न होती। वे अपनी बात लोगों के सामने रख पाते और स्वयं पर हुए अत्याचारों के विषय में लोगों को जागृत करते। हरिहर काका को मीडिया ठीक प्रकार से न्याय दिलवाती। उन्हें स्वतंत्र रूप से जीने की व्यवस्था उपलब्ध करवाने में मदद करती। जिस प्रकार के दबाव में वे जी रहे थे वैसी स्थिति मीडिया की सहायता मिलने के बाद नहीं होती।

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अन्य पाठेतर हल प्रश्न

लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1. हरिहर काका की किस स्थिति ने लेखक को चिंतित कर दिया?
उत्तर-
इस बार जब लेखक हरिहर काका से मिलने गया और उनकी तबीयत के बारे में पूछा तो उन्होंने सिर उठाकर एक बार लेखक की ओर देखा और सिर झुका लिया। इसके बाद उन्होंने दुबारा सिर नहीं उठाया। उनकी यंत्रणा और मनोदशा के बारे में आँखों ने बहुत कुछ कह दिया पर काका कुछ बोल न सके। उनकी इस दशा ने लेखक को चिंतित कर दिया।

प्रश्न 2. लेखक ने कैसे जाना कि हरिहर काका उसे बचपन में बहुत प्यार करते थे?
उत्तर
लेखक को उसकी माँ बताया करती थी कि हरिहर काका बचपन में उसे बहुत प्यार करते थे। वे उसे कंधे पर बिठाकर घुमाया करते थे। एक पिता अपने बेटे को जितना प्यार करता है, हरिहर काका उससे ज्यादा प्यार लेखक को करते थे। वे जितना खुलकर लेखक से बातें करते थे, उतना किसी अन्य से नहीं। हरिहर काका ने ऐसी दोस्ती किसी अन्य के साथ नहीं की। इस तरह उसने जाना कि काका उसे बचपन में बहुत प्यार करते थे।

प्रश्न 3. यंत्रणाओं के बीच जी रहे हरिहर काका की तुलना लेखक ने किससे की है और क्यों ?
उत्तर-
यंत्रणाओं के बीच जी रहे हरिहर काका की तुलना लेखक ने मँझधार में फँसी उस नावे से की है, जिस पर बैठे सवार चिल्लाकर भी अपनी जान की रक्षा नहीं कर सकते हैं। इसका कारण यह है कि उनकी चिल्लाहट दूर-दूर तक फैले सागर की उठती-गिरती लहरों में खोकर रह जाती है। इस तरह उसकी मदद के लिए कोई नहीं आ पाता और वह जहाज डूबकर रह जाती है।

प्रश्न 4. लेखक के गाँव का संक्षिप्त परिचय दीजिए।
उत्तर-
लेखक को गाँव आरा कस्बे से चालीस किलोमीटर दूर है, जिसकी आबादी ढाई-तीन हजार से अधिक ही होगी। इस गाँव में तीन प्रमुख स्थान हैं। गाँव के पश्चिम किनारे का बड़ा-सा तालाब, गाँव के मध्य स्थित बरगद का पुराना वृक्ष और गाँव के पूरब में स्थित ठाकुर जी का विशाल मंदिर। इसे गाँव के लोग ठाकुरबारी कहते हैं। आगे चलकर यही ठाकुरबारी गाँव की पहचान बन गई।

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प्रश्न 5. ठाकुरबारी की प्रबंध समिति और इसके कार्यों का वर्णन कीजिए।
उत्तर-
ठाकुरबारी के नाम पर अच्छी-खासी जमीन और अत्यंत विशाल मंदिर है। यहाँ धार्मिक लोगों की एक समिति है जो ठाकुरबारी की देख-रेख करती है और इसके संचालन हेतु प्रत्येक तीन साल पर एक पुजारी की नियुक्ति करती है। ठाकुरबारी का मुख्य कार्य है-गाँव के लोगों में ठाकुरबारी के प्रति भक्ति-भावना उत्पन्न करते हुए धर्म-विमुख लोगों को रास्ते पर लाना हैं।

प्रश्न 6. गाँववालों का ठाकुरबारी के प्रति अत्यंत घनिष्ठ संबंध है। स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
ठाकुरबारी के साथ अधिकांश लोगों का संबंध मन और तन दोनों स्तर पर बहुत ही घनिष्ठ है। कृषि-कार्य से अपना बचा हुआ समय वे ठाकुरबारी में ही बिताते हैं। ठाकुरबारी में साधु-संतों का प्रवचन सुन और ठाकुर जी का दर्शन कर वे अपना यह जीवन सार्थक मानने लगते हैं। उन्हें यह महसूस होता है कि ठाकुरबारी में प्रवेश करते ही वे पवित्र हो जाते हैं। उनके पिछले सारे पाप अपने आप खत्म हो जाते हैं।

प्रश्न 7. लेखक ठाकुरबारी से घनिष्ठ संबंध क्यों न बना सका?
उत्तर
लेखक मन बहलाने के लिए कभी-कभी ठाकुरबारी में जाता था लेकिन वहाँ के साधु-संत उसे फूटी आँखों नहीं सुहाते। वे काम-धाम करने में कोई रुचि नहीं लेते हैं। ठाकुर जी को भोग लगाने के नाम पर दोनों जून हलवा-पूड़ी खाते हैं और आराम से पड़े रहते हैं। उन्हें अगर कुछ आता है तो सिर्फ बात बनाना आता है। ठाकुरबारी के साधु-संतों की अकर्मण्यता और उनकी बातूनी आदतों के कारण लेखक ठाकुरबारी से अपना घनिष्ठ संबंध नहीं बना सकता।

प्रश्न 8. हरिहर काका के परिवार का संक्षिप्त परिचय दीजिए।
उत्तर-
हरिहर काका का भरा-पूरा परिवार है। उनके चार भाई हैं। सबकी शादी हो चुकी है। हरिहर काका के अलावा सबके बाल बच्चे हैं। बड़े और छोटे भाई के लड़के काफ़ी सयाने हो गए हैं। दो की शादियाँ हो गई हैं। उनमें से एक पढ़-लिखकर शहर के किसी दफ्तर में क्लर्की करने लगा है, लेकिन हरिहर काका की अपनी देह से कोई औलाद नहीं। औलाद के लिए उन्होंने दो शादियाँ कीं, लेकिन बिना बच्चा जने उनकी दोनों पत्नियाँ स्वर्ग सिधार गईं।

प्रश्न 9. हरिहर काका के भाइयों द्वारा अपनी पत्नियों को क्या सीख दी गई? उनके व्यवहार में क्या बदलाव आता गया?
उत्तर-
हरिहर काका के तीनों भाइयों ने अपनी पत्नियों को यह सीख दी थी कि हरिहर काका की अच्छी तरह सेवा करें। समय पर उन्हें नाश्ता-खाना दें। किसी बात की तकलीफ़ न होने दें। कुछ दिनों तक वे हरिहर काका की खोज-खबर लेती रहीं, फिर उन्हें कौन पूछने वाला ? ‘ठहर-चौका’ लगाकर पंखा झलते हुए अपने मर्दो को अच्छे-अच्छे व्यंजन खिलातीं। हरिहर काका के आगे तो बची-खुची चीजें आतीं। कभी-कभी तो हरिहर काका को रूखा-सूखा खाकर ही संतोष करना पड़ता।

प्रश्न 10. अपने भाइयों के परिवार के प्रति हरिहर काका के मोहभंग की शुरुआत कैसे हुई ?
उत्तर-
कभी हरिहर काका की तबीयत खराब हो जाती तो वह मुसीबत में पड़ जाते। इतने बड़े परिवार के रहते हुए भी कोई उन्हें पानी देने वाला तक नहीं था। बच्चे या तो पढ़-लिख रहे होते या धमाचौकड़ी मचाते। भाई खेतों पर गए रहते और औरतें हाल पूछने भी नहीं आतीं। दालान के कमरे में अकेले पड़े हरिहर काका को स्वयं उठकर अपनी ज़रूरतों की पूर्ति करनी पड़ती। ऐसे वक्त अपनी पत्नियों को याद कर-करके हरिहर काका की आँखें भर आतीं। भाइयों के परिवार के प्रति मोहभंग की शुरुआत इन्हीं क्षणों में हुई थी।

प्रश्न 11. स्वादिष्ट पकवान की आस लगाए बैठे हरिहर काका के सामने जब रूखा-सूखा खाना परोसा गया तो उनकी क्या प्रतिक्रिया हुई ?
उत्तर-
भतीजे के मित्र के आने से घर में स्वादिष्ट पकवान बनाए गए थे। हरिहर को स्वादिष्ट पकवान मिलने की आशा थी पर जब उनके सामने रूखा-सूखा भोजन आया तो उन्होंने प्रतिक्रिया स्वरूप-

  • थाली उठाकर बीच आँगन में फेंक दिया, जिससे सारा चावल बिखर गया।
  • गरजते हुए घर की औरतों को देख लेने की धमकी देने लगे।

प्रश्न 12. हरिहर काका ने अपना गुस्सा घर की औरतों पर किस तरह उतारा? उनकी इस प्रतिक्रिया को आप कितना उचित समझते हैं?
उत्तर-
हरिहर काका ने अपना गुस्सा घर की औरतों पर उतारते हुए कहा, ‘समझ रही हो कि मुफ्त में खिलाती हो, तो अपने मन से यह बात निकाल देना। मेरे हिस्से के खेत की पैदावार इसी घर में आती है। उसमें तो मैं दो-चार नौकर रख लूं, आराम से खाऊँ, तब भी कमी नहीं होगी। मैं अनाथ और बेसहारा नहीं हूँ। मेरे धन पर तो तुम सब मौज कर रही हो, लेकिन अब मैं तुम सब को बताऊँगा।” उनकी इस प्रतिक्रिया को उचित नहीं कहा जा सकता क्योंकि इससे बात बनने के बजाय बिगड़ने की संभावना अधिक थी।

प्रश्न 13. परिवार वालों से हरिहर काका के असंतुष्ट होने की बात महंत को कैसे पता चली? यह सुनकर महंत ने क्या किया?
उत्तर-
हरिहर काका जिस वक्त घर की औरतों को खरी-खोटी सुना रहे थे, उसी वक्त ठाकुरबारी के पुजारी जी उनके दालान पर ही विराजमान थे। वार्षिक हुमाध के लिए वह घी और शकील लेने आए थे। उन्होंने लौटकर महंत जी को विस्तार के साथ सारी बात बताई। उनके कान खड़े हो गए। यह सुनकर हाथ आए अवसर का लाभ उठाने के लिए महंत जी ने टीका तिलक लगाया और कंधे पर रामनामी लिखी चादर डाल ठाकुरबारी से चल पड़े।

प्रश्न 14. हरिहर काका का दिल जीतने के लिए ठाकुरबारी के महंत जी ने क्या-क्या उपाय अपनाया?
उत्तर-
हरिहर काका का दिल जीतने के लिए महंत जी ने स्वादिष्ट भोजन खिलाने और धर्म-चर्चा करने जैसे उपाय अपनाए। उन्होंने रात में हरिहर काका को भोग लगाने के लिए जो मिष्टान्न और व्यंजन दिए, वैसे उन्होंने कभी नहीं खाए थे। घी टपकते मालपुए, रस बुनिया, लड्डू, छेने की तरकारी, दही, खीर…। इन्हें पुजारी जी ने स्वयं अपने हाथों से खाना परोसा था। पास में बैठे महंत जी धर्म-चर्चा से मन में शांति पहुँचा रहे थे।

प्रश्न 15. हरिहर काका द्वारा ठाकुरबारी में रात बिताने पर उनके भाइयों पर क्या बीती?
उत्तर-
हरिहर काका को लाने के लिए उनके भाई ठाकुरबारी पहुँचे पर काका का मन अशांत होने की बात कहकर महंत जी ने उन्हें वापस न जाने दिया। इससे काका के तीनों भाई रात भर सो नहीं सके। भावी आशंका उनके मन को मथती रही। पंद्रह बीघे खेत ! इस गाँव की उपजाऊ जमीन ! दो लाख से अधिक की संपत्ति ! अगर हाथ से निकल गई तो फिर वह कहीं के न रहेंगे।

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प्रश्न 16. ठाकुरबारी से लौटे हरिहर काका सुखद आश्चर्य में क्यों पड़ गए?
उत्तर-
ठाकुरबारी से लौटे हरिहर काका सुखद आश्चर्य में इसलिए पड़ गए, क्योंकि परिवार के जिन सदस्यों को उनसे बात करने की भी फुरसत न थी, वही सब अब सिर आँखों पर उठाने को तैयार थे। उनके भाइयों की पत्नियों ने उनके पैर पर माथा रख गलती के लिए क्षमा-याचना की। फिर उनकी आवभगत और जो खातिर शुरू हुई, वैसी खातिर किसी के यहाँ मेहमान आने पर भी नहीं होती होगी। उनकी रुचि और इच्छा के मुताबिक दोनों जून खाना-नाश्ता तैयार मिलने लगा तथा घर की महिलाएँ उनकी सेवा में तल्लीन रहती थीं।

प्रश्न 17. हरिहर काका द्वारा ठाकुरबारी के नाम जमीन लिखने में हो रही देरी के बारे में महंत जी ने क्या अनुमान लगाया? इसके लिए उन्हें क्या विकल्प नजर आया?
उत्तर-
हरिहर काका द्वारा ठाकुरबारी के नाम जमीन लिखने में जो देरी हो रही थी, उसके बारे में महंत जी ने यह अनुमान लगाया कि हरिहर धर्म-संकट में पड़ गया है। एक ओर वह चाहता है कि ठाकुर जी को लिख दें, किंतु दूसरी ओर भाई के परिवार के माया-मोह में बँध जाता है। इस स्थिति में हरिहर का अपहरण कर जबरदस्ती उससे लिखवाने के अतिरिक्त दूसरा कोई विकल्प नहीं। बाद में हरिहर स्वयं राजी हो जाएगा।

प्रश्न 18. महंत जी ने हरिहर काका का अपहरण किस तरह करवाया?
उत्तर-
हरिहर काका से उनकी जमीन का वसीयत करवाने के लिए महंत जी ने उनके अपहरण का रास्ता अपनाया। इसके लिए आधी रात के आसपास ठाकुरबारी के साधु-संत और उनके पक्षधर भाला, आँडासा और बंदूक से लैस एकाएक हरिहर काका के दालान पर आ धमके। हरिहर काका के भाई इस अप्रत्याशित हमले के लिए तैयार नहीं थे। इससे पहले कि वे जवाबी कार्रवाई करें और गुहार लगाकर अपने लोगों को जुटाएँ, तब तक ठाकुरबारी के लोग उनको पीठ पर लादकर चंपत हो गए।

प्रश्न 19. हरिहर काका को छुड़ाने में असफल रहने पर उनके भाई क्या सोचकर पुलिस के पास गए?
उत्तर-
हरिहर काका के भाई उन्हें ठाकुरबारी से छुड़ा पाने में असफल रहे तो वे यह सोचकर पुलिस के पास गए कि जब वे पुलिस के साथ ठाकुरबारी पहुँचेंगे तो ठाकुरबारी के भीतर से हमले होंगे और साधु-संत रँगे हाथों पकड़ लिए जाएँगे, लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। ठाकुरबारी के अंदर से एक रोड़ा भी बाहर नहीं आया। शायद पुलिस को आते हुए उन्होंने देख लिया था।

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प्रश्न 20. पुलिस द्वारा ठाकुरबारी के कमरे से मुक्त कराए गए काका ने वहाँ के महंत, पुजारी और साधुओं की किस असलियत से परिचित कराया?
उत्तर-
पुलिस ने जब हरिहर काका को ठाकुरबारी के एक कमरे से निकालकर बंधन मुक्त किया और उनके मुँह में ढूंसा कपड़ा निकाला तो हरिहर काका ने ठाकुरबारी के महंत, पुजारी और साधुओं की काली करतूतों का परदाफ़ाश करना शुरू किया कि वह साधु नहीं, डाकू, हत्यारे और कसाई हैं, वे उन्हें इस रूप में कमरे में बंद कर गुप्त दरवाजे से भाग गए, इसके अलावा उन्होंने कई सादे और लिखे हुए कागजों पर जबरन उनके अँगूठे के निशान लिए ताकि जमीन-जायदाद पर कब्ज़ा कर सकें।

प्रश्न 21. ठाकुरबारी से छुड़ाकर लाए गए हरिहर काका की सुरक्षा के लिए उनके भाइयों ने क्या-क्या प्रबंध किए?
उत्तर-
ठाकुरबारी के महंत हरिहर काका को बलपूर्वक अपने साथ न ले जा सकें, इसे रोकने और उनकी सुरक्षा के लिए उनके भाइयों द्वारा अपने रिश्ते-नाते में जितने ‘सूरमा’ थे, सबको बुला लिया गया था। हथियार जुटा लिए गए थे। चौबीसों घंटे पहरे दिए जाने लगे थे। अगर किसी आवश्यक कार्यवश काका घर से गाँव में निकलते तो चार-पाँच की संख्या में हथियारों से लैस लोग उनके आगे-पीछे चलते रहते और रात में आधे लोग सोते तो आधे लोग जागकर पहरा देते रहते।

प्रश्न 22. ठाकुरबारी से छुड़ाकर लाए गए हरिहर काका अपने घर के किस वातावरण से अनजान थे?
उत्तर-
ठाकुरबारी से छुड़ाकर लाने के बाद अपने ही घर में हरिहर काका के बारे में नया वातावरण तैयार हो रहा था। उन्हें ठाकुरबारी से जिस दिन वापस लाया गया था, उसी दिन से उनके भाई और रिश्ते-नाते के लोग समझाने लगे थे कि विधिवत अपनी जायदाद वे अपने भतीजों के नाम लिख दें। वह जब तक ऐसा नहीं करेंगे तब तक महंत की गिद्ध-दृष्टि उनके ऊपर लगी रहेगी।

प्रश्न 23. परिवार वालों द्वारा जमीन उनके नाम लिखने की बात पर हरिहर काका की क्या प्रतिक्रिया होती?
उत्तर-
महंत द्वारा पुनः काका का अपहरण करके जमीन-जायदाद ठाकुरबारी के नाम कर देने के भय से मुक्ति पाने के लिए हरिहर काका के परिवार वाले बार-बार उनसे जमीन-जायदाद परिवार वालों के नाम लिखने के लिए कहते इस बात पर हरिहर काका साफ़ नकार जाते। वे कहते, “मेरे बाद तो मेरी जायदाद इस परिवार को स्वतः मिल जाएगी इसीलिए लिखने का कोई अर्थ नहीं। महंत ने अँगूठे के जो जबरन निशान लिए हैं, उसके खिलाफ़ मुकदमा हमने किया ही है।”

प्रश्न 24. हरिहर काका के भाइयों और ठाकुरवारी के साधु-संतों के व्यवहार में कोई अंतर नहीं था। स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
जब हरिहर काका ने अपने भाइयों के कहने पर अपनी जमीन-जायदाद उनके नाम नहीं किया तो उनके भाइयों ने उनके साथ बहुत जुल्म-अत्याचार किया और जबरन अनेक कागजों पर उनके अँगूठे के निशान लिए, इसके अलावा उन्हें खूब मारा-पीटा तथा उनकी कोई भी दुर्गति बाकी नहीं छोड़ी, अगर और थोड़ी देर तक पुलिस नहीं आती तो वह उन्हें जान से मार देते। इससे स्पष्ट है कि हरिहर काका के भाइयों और ठाकुरबारी के साधु-संतों के व्यवहार में कोई अंतर नहीं था।

प्रश्न 25. हरिहर काका की मृत्यु के बाद उनकी जमीन-जायदाद पर कब्जा करने के लिए उनके भाइयों ने क्या योजना बना रखी थी?
उत्तर-
हरिहर काका की मृत्यु के बाद उनकी जमीन पर कब्ज़ा करने के लिए उनके भाई अभी से इलाके के मशहूर डाकू बुटन सिंह से बातचीत पक्की कर ली। हरिहर के पंद्रह बीघे खेत में से पाँच बीघे बुटन लेगा और दखल करा देगा। इससे पहले भी इस तरह के दो-तीन मामले बुटन ने निपटाए हैं। इस योजना द्वारा वे काका की जमीन को कब्ज़ाना चाहते हैं।

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दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1. ‘महंतों और मठाधीशों का लोभ बढ़ाने में लोगों की गहन धार्मिक आस्था का भी हाथ होता है।’ ‘हरिहर काका’ पाठ के आलोक में अपने विचार लिखिए। (मूल्यपरक प्रश्न)
अथवा
लोगों की गहन धार्मिक आस्था के कारण महंत और मठाधीशों में लालच एवं शोषण की प्रवृत्ति बढ़ती जाती है। इससे आप कितना सहमत हैं? स्पष्ट कीजिए। (मूल्यपरक प्रश्न)

उत्तर-
लोगों की धार्मिक आस्था ज्यों-ज्यों बढ़ती है, त्यों-त्यों वे अपने हर अच्छे कार्य का श्रेय धर्म और देवालयों में विराजमान अपने आराध्य को देने लगते हैं। वे यह भूल जाते हैं कि ऐसा उनके परिश्रम के कारण हुआ है। अपनी खुशी की अभिव्यक्ति एवं अपने आराध्य के प्रति वे कृतज्ञता प्रकट करने के लिए धन, रुपये, जेवर आदि अर्पित करते हैं। उनकी इस भावना का अनुचित लाभ वहाँ उपस्थित महंत और मठाधीश उठाते हैं और धर्म का भय तथा स्वर्गलोक का मोह दिखाकर लोगों को उकसाते हैं कि वे अधिकाधिक चढ़ावा चढ़ाएँ जो प्रत्यक्ष और परोक्ष दोनों ही रूपों में उनकी स्वार्थपूर्ति, लोभ, लिप्सा एवं उदरपूर्ति का साधन बनता है। ठाकुरबारी में ज्यों-ज्यों चढ़ावा आता है त्यों-त्यों वहाँ के महंत, पुजारी एवं अन्य साधुओं का लोभ इस तरह बढ़ जाता है कि वे साधुता ही नहीं मानवता को छोड़कर हैवानियत पर उतर आते हैं। वे हरिहर काका की जमीन हड़पने के लिए मानवता को कलंकित करने से भी बाज नहीं आते हैं। इस तरह निस्संदेह मनुष्य की गहन धार्मिक भावना महंतों और मठाधीशों में लोभ, लालच और स्वार्थपरता पैदा करती है।

प्रश्न 2. ‘हरिहर काका’ नामक पाठ में लेखक ने ठाकुरबारी की स्थापना एवं उसके बढ़ते कलेवर के बारे में क्या बताया है?
उत्तर
‘हरिहर काका’ नामक पाठ में लेखक ने ठाकुरबारी की स्थापना एवं उसके विशाल होते कलेवर के बारे में बताया है कि पहले जब गाँव पूरी तरह बसा नहीं था तभी कहीं से एक संत आकर इस स्थान पर झोंपड़ी बना रहने लगे थे। वह सुबहशाम यहाँ ठाकुर जी की पूजा करते थे। लोगों से माँगकर खा लेते थे और पूजा-पाठ की भावना जाग्रत करते थे। बाद में लोगों ने चंदा करके यहाँ ठाकुर जी का एक छोटा-सा मंदिर बनवा दिया। फिर जैसे-जैसे गाँव बसता गया और आबादी बढ़ती गई, मंदिर के कलेवर में भी विस्तार होता गया। लोग ठाकुर जी को मनौती मनाते कि पुत्र हो, मुकदमे में विजय हो, लड़की की शादी अच्छे घर में तय हो, लड़के को नौकरी मिल जाए। फिर इसमें जिनको सफलता मिलती, वह खुशी में ठाकुर जी पर रुपये, जेवर, अनाज चढ़ाते। अधिक खुशी होती तो ठाकुर जी के नाम अपने खेत का एक छोटा-सा टुकड़ा लिख देते। यह परंपरा आज तक जारी है। इससे ठाकुरबारी का विकास हज़ार गुना अधिक हो गया।

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प्रश्न 3. ‘हरिहर काका के गाँव के लोग ठाकुरबारी और ठाकुर जी के प्रति अगाध भक्ति-भावना रखते हैं।’ हरिहर काका पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
यूँ तो ठाकुरबारी में सदा ही भजन-कीर्तन होता रहता है, पर बाढ़ या सूखा जैसी आपदा की स्थिति में वहाँ तंबू लग जाता है और अखंडकीर्तन शुरू हो जाता है। इसके अलावा गाँव में पर्व-त्योहार की शुरुआत ठाकुरबारी से ही होती है। होली में सबसे पहले गुलाल ठाकुरजी को ही चढ़ाया जाता है। दीवाली का पहला दीप ठाकुरबारी में ही जलता है। जन्म, शादी और जनेऊ के अवसर पर अन्न-वस्त्र की पहली भेट ठाकुर जी के नाम की जाती है। ठाकुरबारी के ब्राह्मण-साधु व्रत-कथाओं के दिन घर-घर घूमकर कथावाचन करते हैं। लोगों के खलिहान में जब फ़सल की मड़ाई होकर अनाज की ढेरी’ तैयार हो जाती है, तब ठाकुर जी के नाम का एक भाग’ निकालकर ही लोग अनाज अपने घर ले जाते हैं।

प्रश्न 4. महंत जी ने हरिहर काका की ज़मीन हड़पने के लिए धर्म, मोह और माया का सहारा किस तरह लिया? उनका ऐसा करना आप कितना उचित मानते हैं? (मूल्यपरक प्रश्न)
उत्तर-
खलिहान की ओर जाते हुए गुस्साए हरिहर काका को महंत जी अपने साथ ठाकुरबारी ले आए और उनकी जमीन पाने के लिए धर्म, मोह और माया का सहारा लेते हुए काका से समझाते हुए कहने लगे, “हरिहर ! यहाँ कोई किसी का नहीं है। सब माया का बंधन है। तू तो धार्मिक प्रवृत्ति का आदमी है। मैं समझ नहीं पा रहा हूँ कि तुम इस बंधन में कैसे फैंस गए? ईश्वर में भक्ति लगाओ। उसके सिवाय कोई तुम्हारा अपना नहीं। पत्नी, बेटे, भाई-बंधु सब स्वार्थ के साथी हैं। जिस दिन उन्हें लगेगा कि तुमसे उनका स्वार्थ सधने वाला नहीं, उस दिन वे तुम्हें पूछेगे तक नहीं। इसीलिए ज्ञानी, संत, महात्मा ईश्वर के सिवाय किसी और में प्रेम नहीं लगाते।’
महंत द्वारा हरिहर काका के साथ जैसा व्यवहार किया गया उसे मैं तनिक भी उचित नहीं मानता, क्योंकि इससे महंत काका की जमीन हड़पना चाहते थे। इसके अलावा वे काका के मन में उनके परिवार और भाइयों के प्रति दुर्भावना भी भर रहे थे।

प्रश्न 5. लोभी महंत एक ओर हरिहर काका को यश और बैकुंठ का लोभ दिखा रहा था तो दूसरी ओर पूर्व जन्म के उदाहरण द्वारा भय भी दिखा रहा था। स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
हरिहर काका को समझाते हुए लोभी महंत कह रहा था कि तुम अपने हिस्से की जमीन ठाकुरबारी के नाम लिखकर स्वर्ग प्राप्त करोगे। तुम्हारी कीर्ति तीनों लोकों में फैल जाएगी और सूरज-चाँद के रहने तक तुम्हारा नाम अमर हो जाएगा। इससे साधु-संत भी तुम्हारे पाँव पखारेंगे। सभी तुम्हारा यशोगान करेंगे और तुम्हारा जीवन सार्थक हो जाएगा। ठाकुर जी के साथ ही तुम्हारी भी आरती गाई जाएगी। महंत उनसे कह रहा था कि पता नहीं पूर्वजन्म में तुमने कौन-सा पाप किया था कि तुम्हारी दोनों पत्नियाँ अकाल मृत्यु को प्राप्त हुईं। तुमने औलाद का मुँह तक नहीं देखा। अपना यह जन्म तुम अकारथ न जाने दो। ईश्वर को एक भर दोगे तो दस भर पाओगे। मैं अपने लिए तो तुमसे माँग नहीं रहा हूँ। तुम्हारा यह लोक और परलोक दोनों बन जाएँ, इसकी राह तुम्हें बता रहा हूँ।

प्रश्न 6. महंत की बातें सुनकर हरिहर काका किस दुविधा में फँस गए? पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
महंत की बातें सुनकर हरिहर काका अपनी जमीन किसे दें-भाइयों को या ठाकुर जी के नाम लिखें; इस दुविधा में फैंस गए। वे सोचने लगे कि पंद्रह बीघे खेत की फ़सल भाइयों के परिवार को देते हैं, तब तो कोई पूछता नहीं, अगर कुछ न दें तब क्या हालत होगी? उनके जीवन में तो यह स्थिति है, मरने के बाद कौन उन्हें याद करेगा? सीधे-सीधे उनके खेत हड़प जाएँगे। ठाकुर जी के नाम लिख देंगे तो पुश्तों तक लोग उन्हें याद करेंगे। अब तक के जीवन में तो ईश्वर के लिए उन्होंने कुछ नहीं किया। अंतिम समय तो यह बड़ा पुण्य कमा लें, लेकिन यह सोचते हुए भी हरिहर काका का मुँह खुल नहीं रहा था। भाई का परिवार तो अपना ही होता है। उनको न देकर ठाकुरबारी में दे देना उनके साथ धोखा और विश्वासघात होगा।

प्रश्न 7. ठाकुरबारी के साधु-संतों के व्यवहार से काका को किस वास्तविकता का ज्ञान हुआ? साधु-संतों का ऐसा व्यवहार कितना उचित था? (मूल्यपरक प्रश्न)
उत्तर-
ठाकुरबारी के महंत और अन्य साधु-संत जब काका का अपहरण कर ठाकुरबारी ले आए और कुछ सादे तथा कुछ लिखे कागजों पर जबरन काका के अँगूठे का निशान लिया तब काका को संतों के उस व्यवहार का पता चला जो मुँह में राम बगल में छुरी वाली कहावत चरितार्थ करता है। उन्होंने आदर का पात्र बने महंत के बारे में सपने में भी नहीं सोचा था कि वे इस रूप में भी आएँगे। जिस महंत को वह आदरणीय एवं श्रद्धेय समझते थे, वह महंत अब उन्हें घृणित, दुराचारी और पापी नज़र आने लगा था। अब वह उस महंत की सूरत भी देखना नहीं चाहते थे। अब अपने भाइयों का परिवार मत की तुलना में उन्हें ज्यादा पवित्र, नेक और अच्छा लगने लगा। साधु-संत, जो मोह माया से दूर एवं परोपकारी प्रवृत्ति के समझे जाते हैं उनके द्वारा ऐसा व्यवहार हर दृष्टि से अनुचित था।

प्रश्न 8. आप हरिहर काका के भाई की जगह होते तो क्या करते? (मूल्यपरक प्रश्न)
उत्तर-
यदि मैं हरिहर काका के भाई की जगह पर होता तो हरिहर काका से पूर्णतया सहानुभूति रखता। मैं मन में यह सदा बिठाए रखता कि हरिहर काका की पत्नी इस दुनिया में नहीं हैं और न उनकी अपनी कोई संतान । परिवार का सदस्य और सहोदर भाई होने के कारण मैं उनके मन में यह भावना आने ही न देता कि वे भरे-पूरे परिवार में अकेले होकर रह गए हैं। मैं उनके खाने और उनकी हर सुख-सुविधा का पूरा ध्यान रखता। ऐसा मैं उनकी ज़मीन-जायदाद के लोभ में नहीं करता, बल्कि पारिवारिक सदस्य सहोदर भाई होने के अलावा मानवता के आधार पर भी करता। मैं अपने परिवार के अन्य सदस्यों से काका के साथ अच्छा व्यवहार करने के लिए कहता ताकि उन्हें ठाकुरबारी जैसी जगह जाने और महंत जैसे ढोंगियों के बहकावे में आने की स्थिति ही न आती। मैं उन्हें खाना-खिलाकर स्वयं खाता तथा उनके साथ कोई भेदभाव न होने देता।

NCERT 10th Class Hindi Sanchayan Bhag 2 Chapter 1

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